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Rajasthan Chunav 2023: इन आठ सीटों पर कांग्रेस और चार पर भाजपा दुविधा में, नामों को लेकर नहीं बन पा रही सहमति

Rajasthan Chunav 2023: जयपुर जिले की 19 सीटों में से आठ सीटों पर प्रत्याशी चयन का मामला कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। वहीं चार सीटों पर भाजपा भी प्रत्याशी चयन को लेकर दुविधा में हैं।

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जयपुर

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Kirti Verma

Nov 03, 2023

rajasthan election

Rajasthan Chunav 2023: जयपुर जिले की 19 सीटों में से आठ सीटों पर प्रत्याशी चयन का मामला कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। वहीं चार सीटों पर भाजपा भी प्रत्याशी चयन को लेकर दुविधा में हैं। दोनों ही दल इन सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर फैसला नहीं कर पा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने में अब महज तीन दिन का समय बचा है लेकिन कांग्रेस कई सीटों को लेकर दुविधा में है और उन सीटों पर फैसला नहीं कर पा रही है। जयपुर जिले की भी आठ सीटें ऐसी हैं जहां प्रत्याशी चयन को लेकर पेंच फंसा है। इन सीटों पर मौजूदा विधायकों के विरोध के साथ-साथ एंटी इनकंबेंसी भी बड़ा फैक्टर बताया जा रहा है।

इन सीटों पर फंसा पेंच
हवामहल
मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री महेश जोशी के टिकट के लिए सीएम गहलोत जोर लगाए हुए हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान जोशी को टिकट देने के मूड में नहीं हैं। जोशी को लेकर अल्पसंख्यक वर्ग की नाराजगी भी बड़ी वजह बताई जा रही है। हालांकि मजबूत चेहरे की तलाश के लिए यहां पार्टी को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

विद्याधर नगर
यह कांग्रेस के लिए सबसे मुश्किल सीटों में से एक है। यहां लगातार तीन बार से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा ने यहां से पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी को टिकट दिया है। प्रत्याशी रहे सीताराम अग्रवाल के अलावा चौमूं के पूर्व राजपरिवार की सदस्य रुक्ष्मणि कुमारी के नाम पर भी कांग्रेस विचार कर रही है।

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झोटवाड़ा
यहां से मौजूदा विधायक लालंचद कटारिया चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। पार्टी की ओर से उन्हें यहीं से चुनाव लड़ने के लिए मनाया जा रहा है। पार्टी के सामने अब दुविधा यह है कि कटारिया के स्थान पर मजबूत चेहरा कौन उतारा जाए। इसी के कारण इस सीट पर पार्टी अभी तक फैसला नहीं ले पा रही है।

चौमूं
चौमूं सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर पेंच फंसा है। यहां से लगातार दो बार से कांग्रेस हार रही है। कांग्रेस यहां से माली-सैनी समाज को टिकट देती आई है, लेकिन पीसीसी चीफ डोटासरा अपने नजदीकी शिखा बराला को टिकट दिलाने पर अड़े हैं। वहीं पार्टी का एक खेमा चौमूं के पूर्व राजपरिवार की सदस्य रुक्ष्मणि कुमारी को टिकट दिलाना चाहता है।

चाकसू
मौजूदा विधायक वेद प्रकाश सोलंकी को यहां कार्यकर्ताओं की नाराजगी के साथ-साथ एंटी इन्कमबेंसी का भी सामना करना पड़ा रहा है। उनकी बयानबाजी को लेकर भी पार्टी हाईकमान नाराज है। बताया जाता है कि शीर्ष नेतृत्व उन्हें टिकट देने के पक्ष में नहीं है। प्रत्याशी चयन को लेकर यहां पेंच फंसा है।

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शाहपुरा
कांग्रेस समर्थित आलोक बेनीवाल यहां से निर्दलीय विधायक हैं। पार्टी का एक धड़ा यहां से बेनीवाल को टिकट दिलाना चाहता है, वहीं दूसरा खेमा प्रत्याशी रहे मनीष यादव को फिर से टिकट दिलाने पर अड़ा है। इसी उलझन में इस सीट पर भी फैसला नहीं हो पा रहा है।

आमेर
पिछली बार पायलट समर्थक प्रशांत शर्मा को टिकट दिया गया था। इस बार भी पायलट उनके लिए पैरवी कर रहे हैं। वहीं लालचंद कटारिया की भी इस सीट पर नजर है। कटारिया यहां से पूर्व में विधायक रह चुके हैं। भाजपा ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को फिर से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है। पूनिया के सामने मजबूत चेहरे को लेकर पार्टी दुविधा में है।

जमवारामगढ़
गोपाल मीणा इस आरक्षित सीट से कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं। उन्हें क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी के साथ-साथ एंटी इन्कमबेंसी का सामना करना प़ड़ रहा है। सर्वे रिपोर्ट में भी उनकी स्थिति अच्छी नहीं बताई गई है। अब उनके नाम के साथ-साथ पार्टी कई दूसरे चेहरों पर भी विचार कर रही है।

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