
जयपुर। तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस हर जगह भाजपा पर भारी पड़ी। पार्टी ने गत विधानसभा चुनाव में जीती दोनों सीटों सहाड़ा और सुजानगढ़ को एक बार फिर झोली में डाल लिया है, वहीं भाजपा का गढ़ रही राजसमंद सीट पर भी शानदार प्रदर्शन करते हुए कड़ी टक्कर दी है।
वहीं किसान आंदोलन के मुद्दे पर एनडीए से अलग होकर प्रदेश में उपचुनाव लड़ी रालोपा ने तीनों विधानसभा सीटों पर अपनी ताकत दिखाई। तीनों ही सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बाद रालोपा सबसे अधिक वोट लेने वाली पार्टी बनी।
जीत-हार के मायने
कांग्रेस : गहलोत का कद बढ़ा, डोटासरा मजबूत
दो सीटें बड़े अंतर से जीतने से कांग्रेस का मनोबल काफी बढ़ गया है। एक सीट जो हारी, वह भी काफी कम अंतर से हारी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कद बढ़ा है। प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा भी मजबूत हुए हैं। अशोक गहलोत इन उपचुनावों में सचिन पायलट को भी साथ लेकर चले थे। ऐसे में पार्टी के अंदर जो गुटबाजी थी, वह कितनी कम होगी। अब इसी पर सभी की नजर रहेगी। कुल मिलाकर सीएम अशोक गहलोत का दखल अब पार्टी में और बढ़ेगा।
भाजपा : खुलकर सामने आ सकता है विरोध
भाजपा पंचायत चुनावों में जीती थी और उसी आधार पर अति आत्मविश्वास में नजर आ रही थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया तीनों सीट जीतने का दावा कर रहे थे, लेकिन हाल यह हुए कि दो सीटें बड़े अंतर से हार बैठे। इसका नुकसान पूनिया को होगा। वसुंधरा राजे गुट जो चुनावों से दूरी बनाए हुए था। अब खुलकर सामने आ सकता है। पार्टी के अंदर जो अन्य धड़े हैं, वे भी धीरे-धीरे खुलकर सामने आ सकते हैं।
आरएलपी : तीसरी बढ़ी पार्टी बनने को अग्रसर
तीनों ही सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बाद रालोपा सबसे अधिक वोट लेने वाली पार्टी बनी। पार्टी संयोजक सांसद हनुमान बेनीवाल का मानना है कि तीनों ही सीटों पर सहानुभूति की तेज लहर थी। दूसरा, उन्हें समय भी कम मिला। सहाड़ा और सुजानगढ़ में यदि तीन दिन का समय और मिलता तो तस्वीर अलग हो सकती थी। बेनीवाल ने कहा कि इन सभी सीटों पर पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ा। लेकिन इसके बावजूद जनता को तीसरा विकल्प देने में हम पूरी तरह सफल हुए हैं।
Published on:
02 May 2021 10:27 pm

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