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क्या आप जानते है…? फ़र्ज़ी मतदान, लोकतन्त्र का अपमान है, इसके लिए भुगतनी पड़ सकती है सजा और जुर्माना

Rajasthan Election 2018: मतदान की गोपनीयता को बनाये रखना चुनाव कार्य में लगे सभी शासकीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी हैं।

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जयपुर

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Dinesh Saini

Dec 06, 2018

voting

जयपुर।
फ़र्ज़ी मतदान यानि किसी अन्य व्यक्ति या किसी कल्पित नाम से मत देना। ऐसा करना कानूनन अपराध हैं जिसके लिए IPC धारा 171D/F के तहत 1 वर्ष का कारावास या जुर्माना हो सकता हैं। इसलिए आप सिर्फ अपना ही वोट डाले किसी अन्य का नहीं।

— Election के दिन पोलिंग बूथ पर अपने साथ हथियार रखना या ले जाना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 134B के तहत कानूनन अपराध है जिसके लिए आपको 2 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

— चुनाव हेतु किराये पर अथवा अन्य तरीके से किसी प्रत्याशी द्वारा मतदाताओं को चुनाव केन्द्र तक लाने/ले जाने के लिये परिवहन की व्यवस्था करना, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 133 के तहत अपराध है जिसके लिए 3 माह का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

— मतदान की गोपनीयता को बनाये रखना चुनाव कार्य में लगे सभी शासकीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी हैं। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो ये लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 128 के तहत अपराध हैं जिसके लिए 3 माह का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

— कोई पुलिस अधिकारी चुनाव में किसी को वोट देने या न देने के लिये प्रेरित नहीं कर सकता ना ही किसी व्यक्ति पर कोई दबाव डाल सकता है क्योंकि ऐसा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 129(ख) के तहत अपराध है जिसके लिए 6 माह का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

— मतदान में नियुक्त अधिकारी किसी उम्मीदवार के लिए निर्वाचन संचालन का कार्य नहीं कर सकता ना ही मत दिए जाने को प्रभावित कर सकता है क्योंकि ऐसा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 129(क)के तहत अपराध है जिसके लिए 6 माह का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

— मतदान के दिन मतदान स्टेशन से 100 मीटर के फासले के अन्दर यदि कोई वोट के लिये प्रचार करता है या कोई चुनाव से संबंधित कोई नोटिस या चिन्ह प्रदर्शित करता है तो ये लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 130 के तहत अपराध है जिसके लिए रु 250 का जुर्माना हो सकता है।

— मतदान के दिन और मतदान समाप्त होने के नियत सीमा के 48 घण्टे पूर्व, मतदान क्षेत्र के भीतर शराब या अन्य मादक पदार्थों का विक्रय व वितरण किया जाना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135(3) के तहत मना है जिसके लिए आपको 6 माह का कारावास या जुर्माना हो सकता है।

— मतगणना के स्थान पर या EVM पर कब्जा करना तथा किसी भी मतदाता को मत देने या न देने के लिये बाध्य करना बूथ कैप्चरिंग है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135(A) के तहत अपराध है जिसके लिए आपको 1-3 वर्ष का कारावास और जुर्माना हो सकता है।

— नियोक्ता द्वारा मतदान की तारीख पर मतदान करने के हकदार कर्मचारियों को सवैतनिक-अवकाश ना देना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135(ख)के तहत अपराध है जिसके लिए आपको रु.500 का जुर्माना हो सकता है।


याद रखे: मतदान सबका अधिकार हैं।

— मतदान के दिन मतदान केन्द्र के अन्दर या बाहर लाउड स्पीकर का इस्तेमाल करना जिस से मतदान बाधित हो, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 131(1) के तहत अपराध है जिसके लिए आप गिरफ़्तार हो सकते है साथ ही आपको 3 माह का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकता है।

— वाहन चोरी की e-FIR के बाद क्या आपको ये चिंता हैं कि वो Register हुई या नहीं?

— अगर ऐसा हैं तो चिंता न करे क्यूंकि आपको आपके RMN~ Register Mobile No. पर e-FIR की रसीद के साथ ही FIR no & Investigation Officer का नाम और नंबर भी दिया जाएगा ताकि आप आसानी से अपनी FIR को ट्रैक कर पाएं।

*Steps for E-FIR-Vehicle Theft*

CCTNS Citizen Portal: (link: http://police.rajasthan.gov.in/citizen) police.rajasthan.gov.in/citizen
यदि आपकी Rajasthan SSO Id बनी हुई है तो Log In करें।

यदि नहीं तो 'पंजीकरण' विकल्प का चयन कर Rajasthan SSO ID बनाएं

Log In के बाद Police Citizen Link से e-FIR के विकल्प का चयन कर FIR दर्ज़ करवा दे

किसी भी उम्मीदवार या उसके एजेंट का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी चुनावी अधिकार में हस्तक्षेप करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123(1) के तहत अपराध है । ऐसा करने पर IPC की धारा 171(F) के तहत 1 वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकता है।

Elections के समय किसी भी उम्मीदवार या उसके एजेंट का कोई भी उपहार या प्रस्ताव देना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123(1) के तहत गैर-क़ानूनी हैं। ऐसा करने पर IPC की धारा 171(E) के तहत 1 वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकता है।

कोई भी व्यक्ति ऐसे किसी सूचना या अफवाह का परिचालन करे जिस से भिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों के बीच शत्रुता, घृणा की भावनाएं पैदा हो तो उसे IPC की धारा 502(2) के तहत 5


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