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इस बार सरकार चुनने के लिए ’35 सेकंड’ काफी नहीं, वीवीपैट से होगी यह परेशानी

कुल 540 मिनट होता है मतदान। एक मतदाता को मिलते हैं औसत 35 सेकंड, लग सकते हैं पौने दो घंटे तक ज्यादा

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इस बार सरकार चुनने के लिए '35 सेकंड' काफी नहीं, वीवीपैट से होगी यह परेशानी

मनीष शर्मा/जयपुर. इस बार जब आप मतदान करने जाएं तो ध्यान रखें कि पिछले चुनाव की बजाय 'सरकारÓ चुनने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। खासतौर पर अगर आप शाम 5 बजे से थोड़ा पहले जाकर मतदान करने की सोच रहे हों तो हो सकता है पंक्ति में आपको अपनी बारी के लिए देर तक रुकना पड़े। ऐसा होगा ईवीएम से जुड़ी वीवीपैट मशीन के कारण। ज्यों ही आप ईवीएम पर पसंदीदा उम्मीदवार का बटन दबाएंगे तो वीवीपैट पर वोटिंग स्लिप भी दिखाई देगी। यह स्लिप सात सेकंड तक डिस्प्ले होगी। इससे पंक्ति में खड़े मतदाता की बारी देरी से आएगी। वहीं दिव्यांग और निरक्षर मतदाता को तो और अधिक समय लग सकता है।

समझिए क्यों लगेगा वक्त
पोलिंग बूथ में मतदान तीन चरणों में होता है। पहचान पत्र दिखाना, उंगली पर स्याही लगवाना और ईवीएम का बटन दबाना। राजस्थान में कुल 4,76,72,871 मतदाता हैं और 51,796 पोलिंग बूथ। यानी एक बूथ पर औसत 920 मतदाता। 08 बजे से शाम 5 बजे तक यानी 540 मिनट में सभी वोट डालने जाएं तो हर मतदाता को औसत 35 सेकंड का समय मिलेगा। वीवीपैट में सात सेकंड तक रहने वाली वोटिंग स्लिप के कारण अब 42 सेकंड लगेंगे।

एमपी, छत्तीसगढ़ में हुई देरी
एक पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1400 मतदाता हो सकते हैं। इतनी संख्या वाले बूथों पर तो एक वोटर को मतदान के लिए 23 सेकंड ही मिल पाते हैं। यानी एक मिनट में तीन वोटर भी मतदान नहीं कर सकते। अब वीवीपैट होने पर तो मतदाता को ज्यादा समय लगेगा। कल मध्यप्रदेश और 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ में हुए मतदान में कई बूथों पर ज्यादा मतदान हुआ। मतदाताओं को शाम पांच बजे बाद लंबा इंतजार करना पड़ा। इसके पीछे वीवीपैट से लगने वाला अतिरिक्त समय भी बड़ी वजह मानी जा रही है। मध्यप्रदेश में एक वोटर को औसत 42 सेकंड व छत्तीसगढ़ में 41 सेकंड
मिलते हैं।

इनका कहना है
शाम 5 बजे तक पोलिंग बूथ के परिसर में प्रवेश करने वाले हरेक मतदाता को मतदान कराया जाता है। पर यह सही है कि वीवीपैट मशीन से मतदान में ज्यादा समय लगेगा।
आनंद कुमार, मु. निर्वाचन अधिकारी, राज.