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Rajasthan Election 2023 Result: राजस्थान में कांग्रेस इस वजह से हार गई चुनाव, जानिए बड़े कारण

Rajasthan Election 2023 Result: राजस्थान में रिवाज बदलने का ख्वाब अधूरा रह गया और राज बदलने का नारा साकार हो गया। विधानसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करें तो कांग्रेस की हार के कारणों पर नजर डालना जरूरी हो जाता है।

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Rajasthan Election 2023 Result: Reasons for Congress defeat in Rajasthan

जग्गोसिंह धाकड़

राजस्थान में रिवाज बदलने का ख्वाब अधूरा रह गया और राज बदलने का नारा साकार हो गया। विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजों का विश्लेषण करें तो कांग्रेस की हार के कारणों पर नजर डालना जरूरी हो जाता है। सवाल यह कि कांग्रेस की तमाम गारंटियों को मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया। कह सकते हैं कि अशोक गहलोत की ‘जादूगरी’ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू भारी पड़ गया।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम आने के बाद फिर से एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस को सत्ता मिलने का सिलसिला जारी रहा। पुरानी योजनाओं के साथ नई सात कल्याणकारी योजनाओं की गारंटी पर भी मोदी की गारंटी भारी पड़ी। कांग्रेस के ज्यादातर मंत्री भी चुनाव हार गए।

हार के कारणों का मंथन कांग्रेस ने शुरू किया है, लेकिन कांग्रेस की हार का बड़ा कारण ज्यादातर मौजूदा विधायकों को ही जिताऊ बताकर टिकट रिपीट करना भी रहा है। इसके साथ ही कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के प्रति जनता की नाराजगी भारी पड़ी। सरकार बचाने में मदद करने वाले विधायकों को टिकट दिलाते समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस बात पर गौर नहीं कर पाए कि जनता में मंत्री और विधायकों को लेकर कितनी नाराजगी थी। हालांकि 2013 की तुलना में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है। 2018 में चुनाव होने के बाद जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, तब से ही मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर संघर्ष शुरू हो गया।

यह संघर्ष पूरे पांच साल चला। ऐसा समय भी आया जब विधायक दो गुटों में बंटकर होटलों में कैद रहे। बाड़ेबंदी के दौरान मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कई तरह से राजनीतिक खेल चले। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच हुए विवाद के चलते पार्टी कार्यकर्ताओं में नकारात्मक संदेश गया। कांग्रेस को उम्मीद थी कि पुरानी पेंशन योजना लागू करने और सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के बल पर सत्ता में वापसी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा, कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने में सफल रही।

कांग्रेस सरकार की विफलताओं को लेकर भाजपा का आक्रामक प्रचार भी कांग्रेस के प्रचार अभियान पर भारी पड़ा। भाजपा ने कांग्रेस पर कानून व्यवस्था में विफल होने और तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए मतों के धुव्रीकरण के लिए अभियान चलाया। इसके साथ ही भाजपा ने किसी एक नेता के हाथ में पूरी कमान नहीं दी। राज्य के सभी नेताओं को साधते हुए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा और टिकट वितरण में सभी का ध्यान रखा गया।

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इससे भाजपा में संतुलन बना रहा। दूसरी ओर, कांग्रेस में चुनाव से ठीक पहले गहलोत और पायलट गुट ने एक-दूसरे पर जुबानी हमले बंद तो कर दिए, पर कार्यकर्ता अंत तक बंटे रहे। इसके साथ ही कांग्रेस की ओर से टिकट वितरण प्रक्रिया के तहत कराए गए सर्वे भी खरे नहीं उतरे। पार्टी ने फीडबैक में हारने की संभावना वाले विधायक और पहले चुनाव हार चुके नेताओं के टिकट काटने के बजाय उन्हें फिर से मैदान में उतार दिया। कई जगह कांग्रेस भितरघात जैसे हालात से भी नहीं बच पाई।


टिकट वितरण के दौरान प्रत्याशियों के चयन में अपने गुट के विधायकों को टिकट दिलाने की होड़।

महिलाओं से जुड़े अपराध बढ़ने से पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ माहौल बना।

तुष्टीकरण के मुद्दे को भाजपा ने प्रभावी ढंग से उठाया।

भर्ती परीक्षाओं के बार-बार पेपर लीक होने के कारण युवाओं में निराशा थी।

विधायकों की मनमानी।

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