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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 : भाजपा का मजबूत किला है चूरू विधानसभा सीट

Churu Assembly Seat : प्रदेश की चूरू विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी की सबसे मजबूत गढ़ों में से एक मानी जाती है। इस सीट से राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ लगातार जीतते आ रहे हैं। हालांकि, 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारानगर से चुनाव लड़ा था और जीत भी गए थे।

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Rajendra Rathore

Rajendra Rathore

Churu Assembly Seat : प्रदेश की चूरू विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी की सबसे मजबूत गढ़ों में से एक मानी जाती है। इस सीट से राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ लगातार जीतते आ रहे हैं। हालांकि, 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारानगर से चुनाव लड़ा था और जीत भी गए थे। इस सीट पर सबसे पहले चुनाव वर्ष १९५१ में हुआ था। तब कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे कुंभा राम आर्य ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1957 और 1962 के विधानसभा चुनाव में मोहर सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इन दोनों चुनाव में जीत दर्ज की थी। वहीं, 1967 के चुनाव में एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी मेघ राज माली ने मोहर सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी।

1972 में फिर जीते मोहर सिंह
पांच साल बाद 1972 में हुए चुनाव में मोहर सिंह जीतने में कामयाब रहे। हालांकि इस बार, निर्दलीय की बजाए वह कांग्रेस की टिकट पर मैदान पर उतरे थे।

जनता पार्टी की लहर में हारे
मोहर 1977 में जनता पार्टी की लहर में मोहर सिंह हार गए। उनके सामने जनता पार्टी की टिकट पर मेघ राज माली मैदान में थे।

फिर कांग्रेस के खाते में आई सीट
1980 और 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से यह सीट जीतने में कामयाब रही। 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने भालू खान को टिकट दिया था। जबकि, 1985 में हमीदा खान इस सीट से जीतने में कामयाब रही।

1990 में हुई राजेंद्र राठौड़ की एंट्री
कथित बोफोर्स घोटाले को लेकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बिगुल बजाने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर जनता दल का गठन किया। वर्ष 1990 में हुए विधानसभा चुनाव ने जनता दल ने राजेंद्र राठौड़ को अपना प्रत्याशी बनाया जिन्होंने शानदार जीत दर्ज कर फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1993 में हुए चुनाव से पहले राजेंद्र राठौड़ ने जनता दल से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा की टिकट पर फिर से वह यह सीट जीतने में कामयाब रहे। 1998 के चुनाव में अशोक गहलोत के नेतृत्व में भले ही कांग्रेस ने प्रदेश में शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन राठौड़ चूरू सीट को बचाने में कामयाब रहे।

2003 में भाजापा लहर में जीते
2003 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में फिर से सत्ता में लौट आई। राठौड़ ने पार्टी का भरोसा कायम रखा और यहां से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। हालांकि, 2008 में हुए चुनाव में कांग्रेस फिर से सत्ता में लौट आई, लेकिन राठौड़ चूरू के बजाए तारानगर से मैदान में उतरे और वहां से जीतकर विधानसभा पहुंचे।

2008 के चुनाव में कांग्रेस के मकबूल मंडेलिया चूरू सीट से जीतने में कामयाब रहे। 2013 में फिर भाजपा के पाले में आई सीट २०१३ के चुनावों में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर भाजपा फिर से सत्ता में आई। इस बार पार्टी ने राठौड़ को फिर से चूरू से अपना उम्मीदवार बनाया था और वह जीतने में कामयाब रहे। 2018 के चुनावों में वह फिर से जीतकर विधानसभा पहुंचे। वर्तमान में वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।