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करवा चौथ विशेष : ..और चांद हमेशा करती रही दुआ…, मेरा सूरज हमेशा चमकता रहे

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rajendra rathore and wife

करवा चौथ विशेष : ..और चांद हमेशा करती रही दुआ..., मेरा सूरज हमेशा चमकता रहे

विकास जैन / जयपुर। एक राजनेता का जीवन कितना व्यस्तता भरा हो सकता है। यह उनके परिजनों से जानें। इस करवा चौथ पर जब पत्रिका टीम ने राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की धर्मपत्नी चांद कंवर राठौड़ ने उनसे कुछ अनुभव जानने पहुंची तो वे भावुक हो गई। उन्होंने बताया कि करवा चौथ पर जब ये नहीं आ पाते थे तो इन्हें अपने पास ही महसूस कर इनकी तस्वीर देखकर और मन में बसे इनके स्वरूप को देखकर अपना व्रत खोलती थी।

चांद कंवर के मुताबिक वर्ष 1979 में उनका विवाह हुआ और इसके बाद 11 सालों तक वे हनुमानगढ़ अपने ससुराल में रही। इन 11 सालों में हर करवा चौथ पर उन्होंने पूरे मन से अपने पति के लिए व्रत रखा, लेकिन हर बार अपने राजनीतिक जीवन व्यस्ताताओं के चलते राठौड़ कभी नहीं पहुंच पाए। दांपत्य जीवन में ऐसे पल तो जटिल होते ही हैं कि आप इंतजार करें और वो नहीं आ पाएं..। लेकिन उस समय भी चांद कंवर यही सोचती थी कि वो जहां भी हैं...उनके सामने ही हैं..।

उन्होंने बताया कि अपने मन के इन पलों को बयां करते हुए मैं भावुक भी हुई...लेकिन अगले ही पल कहा... राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी जटिलता भी शायद यही है..। आप सार्वजनिक जीवन जीते हो तो आपको अपने पारिवारिक जीवन के कई अनमोल पलों को खोना ही पड़ता है। यह उन्होंने महसूस भी किया, लेकिन उसे कभी भी अपनी भावनाओं पर हावी नहीं होने दिया। चांद कंवर ने बताया कि मैंने अपने जीवन में यही भावना रखी की वे हमेशा चांद के जैसे शीतल रहें और हमेशा अपने जीवन में सूरज की तरह चमकते रहें।

चांद कंवर ने बताया कि मैंने हमेशा इनके लिए निर्जला व्रत रखा। कई बार ऐसा हुआ की चांद ना दिखा तो भूखा ही सोना पड़ा। कभी भी बिना चांद देखे या नियम तोड़कर व्रत नहीं छोड़ा। जब भी चांद का समय होता राठौड़ कही न कही जनता की सेवा में ही होते थे। अपने पति के प्रति भावनाओं को व्यक्त कुछ यूं किया चांद कंवर राठौड़ ने..

चांद को अर्घ देकर करती हूं ये दुआ
तुझे लग जाए उम्र मेरी और ग़म रहे हमेशा जुदा