
गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)
जयपुर। नकली बीज और कथित रिश्वत कांड को लेकर राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा है। डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट कर कहा कि करोड़ों रुपए के खाद-बीज रिश्वत कांड में मंत्री के करीबी लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब कार्रवाई की आंच उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।
डोटासरा ने लिखा, "अब गिरफ्तारी की आंच अपने दरवाजे तक पहुंचती देख कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल जी मुख्यमंत्री को ही 'लक्ष्मण रेखा' यानी अपनी हद में रहने की धमकी दे रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि अब मंत्री किरोड़ी लाल मीणा मुख्यमंत्री के अधीन काम करने वाली एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को राजनीतिक हथियार बताकर खुद को फंसाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर कृषि मंत्री किस डर से इतना तिलमिला रहे हैं? कल तक जो दूसरों पर कीचड़ उछालते थे, आज अपनी बारी आने पर व्यवस्था, एजेंसियों और मुख्यमंत्री तक को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।" उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे जवाब मांगते हुए लिखा, "मुख्यमंत्री जी… घबराइए मत, राजस्थान को सच्चाई बताइए। क्या आपका कैबिनेट मंत्री भ्रष्टाचार के जाल में फंसा है? अगर एसीबी राजनीतिक हथियार है तो इसका जवाब आपको देना होगा और अगर एसीबी निष्पक्ष है तो भ्रष्टाचारियों को जेल में डालिए।"
दरअसल, इससे पहले कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा नकली बीज घूस कांड को लेकर एसीबी मुख्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने एसीबी के डीजी से मुलाकात करने के बाद मीडिया से कहा था कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसके तथ्यों को सार्वजनिक कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर "मंत्री" और "डॉक्टर" शब्दों का उल्लेख किसके लिए किया गया था। उनका कहना था कि वे खुद डॉक्टर भी हैं और मंत्री भी, इसलिए जनता के बीच भ्रम पैदा हुआ।
किरोड़ी लाल मीणा ने यहां तक कहा था कि यदि मामले में उनका नाम है तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, ताकि भविष्य में यह आरोप न लगे कि सत्ता में होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि एसीबी किसी दबाव में काम कर रही है और "एक पॉलिटिकल वेपन की तरह कार्रवाई कर रही है।" साथ ही उन्होंने एसीबी को "लक्ष्मण रेखा" नहीं लांघने की नसीहत दी थी।
इधर, डोटासरा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि जो नेता वर्षों से दूसरों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाते रहे हैं, उन्हें अब खुद पर उठ रहे सवालों से परेशानी क्यों हो रही है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच चाहिए तो मंत्री को पद छोड़कर जांच का सामना करना चाहिए। फिलहाल पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है, जबकि एसीबी की जांच जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है।
Updated on:
19 Jun 2026 09:44 pm
Published on:
19 Jun 2026 09:23 pm
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