26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जल बंटवारे के दो बड़े विवाद सुलझे, अब गुजरात और पंजाब से अपने हक का पानी लेने की बारी

मध्यप्रदेश के साथ ईआरसीपी और हरियाणा से यमुना जल बंटवारा समझौते का विवाद सुलझने के बाद अब सरकार की नजर गुजरात और पंजाब से हुए करार पर है।

2 min read
Google source verification
rajasthan_government_water_dispute_with_gujarat_and_punjab.png

जयपुर। मध्यप्रदेश के साथ ईआरसीपी और हरियाणा से यमुना जल बंटवारा समझौते का विवाद सुलझने के बाद अब सरकार की नजर गुजरात और पंजाब से हुए करार पर है। दोनों राज्यों से राजस्थान में पानी आना है, लेकिन कई दशक बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस है।

गुजरात से अपने हिस्से का 40 टीएमसी पानी लेना है और पंजाब से रावी व व्यास नदी का बाकी पानी लिया जाना है। इस मामले में जल संसाधन विभाग ने गुजरात और पंजाब दोनों सरकारों को कई बार ध्यान दिलाया है। केन्द्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ भी बातचीत हुई है।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले में अब जलशक्ति मंत्रालय भी सक्रिय है, ताकि राजस्थान को अपने हिस्से का पानी मिल सके। विवाद सुलझता है तो डूंगरपुर, बांसवाड़ा के अलावा पश्चिमी राजस्थान के बड़े इलाके को पानी मिल सकेगा।



कब हुआ अनुबंध

वर्ष 1981 में रावी और व्यास नदी से पानी देने के लिए राजस्थान और पंजाब सरकार के बीच समझौता हुआ। इसमें हरियाणा सरकार भी शामिल है। राजस्थान को दोनों नदियों के जरिए 8.60 एमएएफ (मिलीयन एकड़ फीट) पानी मिलना था।

इसमें से अभी 8 एमएफए पानी मिल रहा है लेकिन 0.60 एमएएफ हिस्सा अब तक नहीं दिया गया। केन्द्रीय जल आयोग और जलशक्ति मंत्रालय के सामने दोनों राज्य अपना-अपना पक्ष रख चुके हैं।

अटकने पर अपने-अपने तर्क

राजस्थान सरकार का दावा है कि समझौते के तहत पंजाब सरकार को तब तक ही 0.60 एमएएफ पानी का उपयोग करने की अनुमति थी, जब तक की राजस्थान पूरे पानी का उपयोग करने के लिए सक्षम नहीं हो जाए। राजस्थान कई वर्ष पहले ही इसकी जरूरत जता चुका है। जबकि, पंजाब सरकार तर्क देरी रही है कि रावी और व्यास दोनों नदियों में इतना पानी नहीं है कि बाकी हिस्से का पानी राजस्थान को दिया जा सके।

....................

यह है समझौता

राजस्थान व गुजरात सरकार के मध्य 10 जनवरी 1966 को समझौता हुआ था। इसके तहत गुजरात सरकार से माही बांध निर्माण में 55 फीसदी लागत देने व 40 टीएमसी पानी लेने पर सहमति बनी। जब नर्मदा का पानी गुजरात के खेड़ा जिले में पहुंच जाएगा, तब गुजरात राजस्थान के माही बांध का पानी उपयोग में नहीं लेगा और उस पानी का उपयोग राजस्थान में ही होगा।

वर्षों पहले नर्मदा का पानी खेड़ा तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद समझौते की पालना नहीं हो रही है और गुजरात ने माही के पानी पर हक बरकरार रखा है।
तो बदल जाए तस्वीर.. राजस्थान और गुजरात सरकार स्तर पर समझौते की पालना होने पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई सुविधा की तस्वीर ही बदल जाएगी।

---------

सवाल जो जवाब चाह रहे...
> केन्द्रीय जल आयोग में तथ्यात्मक पहलुओं के साथ कई बार हाजिरी लगाई। फिर भी बंटवारा विवाद सुझाने में नाकाम। फिर जल बंटवारा समझौता के मायने क्या रह गए।
> प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली की दूरी नापी, पर पड़ौसी राज्यों ने संज्ञान नहीं लिया।

जल संसाधन विभाग (मुख्य अभियंता) भुवन भास्कर क्या बोले- "जो भी जल बंटवारा समझौते हुए हैं, वे सरकार के संज्ञान में है। गुजरात और पंजाब से हुए समझौते पर भी बातचीत चलती रही है। इन मामलों में भी समाधान की राह तलाशी जा रही है।"

यह भी पढ़ें : जलदाय विभाग-शहर में पहला ग्रीन स्वच्छ जलाशय-शहर को पानी और कैंपस को बिजली सप्लाई होगी