
प्रतीकात्मक तस्वीर
राजस्थान में जयपुर सहित पूरे प्रदेश में भजनलाल सरकार परिवहन व्यवस्था को नया रूप देने जा रही है। इसके तहत प्रदेश में महाराष्ट्र मॉडल को अपनाया जाएगा। इस संबंध में स्वायत्त शासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधानसभा में बताया कि जयपुर शहर में 300 सीएनजी एसी एवं 150 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। वहीं किराए पर भी बसें चलाई जाएंगी।
खर्रा प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि जयपुर शहर में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में विस्तार करने के लिए 300 सीएनजी चलित एसी मिनी बसों की निविदा प्रक्रिया जारी है और इसकी तकनीकी निविदा जल्द खोली जाएगी एवं इसके बाद परीक्षण कर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
इसके अतिरिक्त पीएम ई-बस सेवा योजना में नई 150 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए भी केन्द्र सरकार के स्तर से निविदा गत दो जनवरी को खोली जा चुकी है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि जयपुर शहर में परिवहन की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के आपसी समन्वय एवं संसाधनों का सदुपयोग कर नई इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी बसें चलाने की कार्यवाही भी की जा रही है। इन बसों का संचालन प्रतिदिन न्यूनतम किराए के अनुसार भुगतान कर किया जायेगा तथा सरकार इन बसों में परिचालक नियुक्त कर आय अर्जित कर पायेगी। इससे आमजन को कम खर्च में बेहतरीन परिवहन सुविधाएं मिलेंगी।
इससे पहले विधायक कालीचरण सराफ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि शहरी मामलों के मंत्रालय के मानकों के तहत पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 10 हजार की आबादी पर 6 बसों के हिसाब से 40 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए 2 हजार 400 बसों का प्रावधान है। वर्तमान में जेसीटीएसएल द्वारा जयपुर शहर में 27 मार्गों पर 200 बसों का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त आमजन को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा के लिए परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित 43 मार्गों पर 2 हजार 424 मिनी बसों पर परमिट जारी हैं। साथ ही 41 हजार 913 ऑटो रिक्शा (थ्री-व्हीलर) एवं 45 हजार 508 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं।
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यूडीएच मंत्री ने कहा कि अभी एक नई प्रक्रिया के तहत बसें खरीदने के मॉडल पर हमारी कुछ कंपनियों से बातचीत चल रही है। जिस तरह महाराष्ट्र में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसें लेते हैं, उन्होंने विभिन्न नगर निकायों को बसों को किराए पर दे रखा है। उसमें प्रतिदिन के हिसाब से किराया देना पड़ता है। हमारा काम केवल कंडक्टर रखकर जनता को सेवा देना रहेगा। इससे जो घाटा होगा तो सरकार वहन करेगी।
Published on:
06 Feb 2025 01:35 pm
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