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जनता को बांध का पानी देने में ना नुकर, 800 ट्यूबवेल से पार्क पी रहे निर्मल जल

जयपुर. दिल्ली, मुंबई व हैदराबाद जैसे बड़े शहर सीवरेज के गंदे पानी से पार्कों को हरा-भरा रख रहे हैं। इधर जयपुर में, भूजल का अंधाधुंध दोहन कर पार्कों को निर्मल जल पिलाकर बंजर भविष्य की नींव रखी जा रही है। रोजाना जमीन की कोख से 800 से अधिक ट्यबवेल हजारों लाख लीटर पानी खींचकर शहर […]

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जयपुर. दिल्ली, मुंबई व हैदराबाद जैसे बड़े शहर सीवरेज के गंदे पानी से पार्कों को हरा-भरा रख रहे हैं। इधर जयपुर में, भूजल का अंधाधुंध दोहन कर पार्कों को निर्मल जल पिलाकर बंजर भविष्य की नींव रखी जा रही है। रोजाना जमीन की कोख से 800 से अधिक ट्यबवेल हजारों लाख लीटर पानी खींचकर शहर के 1300 से अधिक पार्कों में घास और पेड़ों को सींच रहे हैं। जबकि लगभग सभी पार्कों के आस-पास से सीवर लाइन गुजर रही है, इसका गंदा जल इस्तेमाल कर न सिर्फ भू-जल स्तर कायम रखा जा सकता है, बल्कि इको-फ्रेंडली सिंचाई व्यवस्था से राजधानी को ग्रीन सिटी की दिशा में आगे किया जा सकता है।

प्राकृतिक रूप से सिंचाई लायक बनाते गंदा जल

दिल्ली के लोधी गार्डन, रोज गार्डन जैस बड़े पार्कों व मुंबई व हैदराबाद के कई पार्कों में सीवरेज के पानी को परिशोधन करने के लिए मृदा जैव प्रौद्योगिकी (एसबीटी) संयंत्र लगा रखे हैं, जिनसे पानी को प्राकृतिक रूप से साफ कर पेड़-पौधों में दिया जा हरा है। जयपुर में रोजाना एक—एक ट्यूबवेल 80 से 100 लाख लीटर पानी तक का दोहन किया जा रहा है। सेंट्रल पार्क जैसे बड़े पार्कों में एक साथ कई ट्यूबवेल हैं। जिन पार्कों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखे हैं, उसका ट्रीटेड पानी भी जरूरत के मुकाबले बहुत कम है, जिससे उन पार्कों में भी ट्यूबवेल का सहारा लिया जा रहा है।

सिर्फ 24 एसटीपी, पानी भी प्रदूषित

जेडीए और नगर निगम ने सीवरेज के पानी को उपचारित (ट्रीटेड) करने के लिए 24 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगा रखे हैं, लेकिन इनमें 15 एसटीपी का ट्रीटेड पानी केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तय मानकों के अनुसार सही नहीं कर हैं। इस पानी को शहर के सेंट्रल पार्क, रामनिवास बाग व जवाहर सर्कल सहित कई पार्कों में दिया जा रहा है। जबकि 3 एसटीपी बंद पड़े हैं।

शहर में पार्क व ट्यूबवेल

  • 101 पार्क जेडीए के : इनमें 80 से अधिक ट्यूबवेल।
  • 1258 पार्क नगर निगम के: जहां 700 से अधिक ट्यूबवेल

शहर के बड़े पार्कों की स्थिति

पार्क - ट्यूबवेल की संख्या
सेंन्ट्रल पार्क - 7
नेहरू बालोद्यान - 2
जवाहर सर्कल पार्क - 2
महावीर पार्क - 2

भूजल स्तर: जयपुर डार्क जोन में

  • 217 प्रतिशत हो रहा शहर में भूजल दोहन
  • 100 प्रतिशत से अधिक भूजल दोहन पर डार्क जोन में शामिल हो जाता है क्षेत्र
  • शहर के पार्कों में ट्यूबवेल ही सिंचाई का मुख्य साधन

एसबीटी संयंत्र से ये फायदे

  • भूजल दोहन नहीं होगा
  • सीवरेज के पानी का सदुपयोग हो सकेगा
  • अपशिष्ट जल से कार्बनिक प्रदूषकों, नाइट्रेट और फॉस्फेट को हटाया जा सकता है
  • जयपुर को ग्रीन सिटी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है

क्या है एसबीटी संयंत्र…

मृदा जैव प्रौद्योगिकी (एसबीटी) संयंत्र में सीवरेज पानी को प्राकृतिक रूप से साफ किया जाता है, जिसमें मिट्टी और सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके सीवरेज और औद्योगिक वेस्ट वाटर को ट्रीट किया जाता है, जो सेल्फ-सस्टेनिंग और इको-फ्रेंडली होता है।

धीरे—धीरे भूजल नीचे चला जाएगा
जेडीए और नगर निगम अभी पार्कों में भूजल का उपयोग कर रहा है, जो पूर्णतया अनुचित है। इससे धीरे—धीरे भूजल नीचे चला जाएगा, पानी की बहुत समस्या हो जाएगी। अगर सीवरेज के पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध कर पौधों में दिया जाता है तो भूजल दोहन रुकेगा, साथ ही यह पानी पौधों के लिए उपजाऊ भी होगा।
- महेश तिवाड़ी, पूर्व उप वन संरक्षक, जेडीए

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