
बजरी खनन से रोक हटी पर जनता को पहले जैसी राहत नहीं, यों समझें बजरी खनन का गणित
संजय कौशिक/जयपुर। प्रदेश में अवैध बजरी खनन की आड़ में चार साल तक जनता लुटती रही और बजरी माफिया ने जरूरतमंदों को मुंह मागी कीमत में बजरी बेची। अब बजरी खनन पर से सुप्रीम कोर्ट के रोक हटाए जाने के बाद उम्मीद थी कि बजरी सस्ती होगी, लेकिन अब भी सभी मायनों में जनता को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। आदेश की पालना में सख्ती न होने के चलते बजरी खरीदार आज भी ‘बजरबट्टू’ (मूर्ख) ही बन रहा है।
-कीमत पहले...अब
जयपुर में अब भी टै्रक्टर-ट्रोली (170 फीट) पहले की तरह 12000 से 12500 में ही मिल रही है। बड़ा ट्रक बजरी लेने पर जरूर चार-पांच रुपए फुट की सस्ती मिल रही है। पहले एक ट्रक बजरी लेने पर करीब 1300 रुपए प्रति टन देने पड़ रहे थे, वो अब 1150 रुपए टन के आस-पास देने पड़ रहे हैं। बजरी की कीमत को लेकर कारोबारियों का मानना है कि नदियों की सभी खानें चालू हों, तो ही जनता को असल में राहत मिलेगी।
-याद रहेगा बजरी माफिया-पुलिस गठबंधन
बजरी खनन पर रोक के चलते यह अवैध कारोबार पुलिस की मिलीभगत से चलने की खूब खबरें आ रही थी। बड़ी संख्या में बजरी ट्रकों से मासिक बंदी लेते पुलिस के छोटे से बड़े अधिकारी तक पकड़े भी गए। यहां तक की प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने सार्वजनिक रूप में लाचारगी जताते हुए कबूल किया था कि बजरी माफिया से हमारी पुलिस मिली हुई है। हालांकि अब बजरी से रोक हटने से पुलिस की दादागिरी जरूर कम हुई है। इसी सिर्फ इसी वजह से बजरी की कीमत में प्रति टन सौ से डेढ़ सौ रुपए की कमी आई है। राजधानी जयपुर में बजरी फिलहाल काफी दूर कोटड़ी से आ रही है। टोंक के आस-पास बजरी खानें चालू होने पर जरूर कीमतों में कुछ और कमी हो सकती है।
खानों को अनुमति, 3 से ही खनन शुरू
खान विभाग ने अब तक प्रदेश में बनास व अन्य नदियों में छह खानों को ही अनुमति दी है। पहले दो जालोर और एक भीलवाड़ा में बजरी की खान को स्वीकृति दी थी। ये खानें चालू हो चुकी हैं। लेकिन दो दिन पहले टोंक जिले के देवली, राजसमंद और नाथद्वारा में तीन और बजरी खानों को स्वीकृति जारी की गई है। ये तीनों खानें करीब तीन हजार हैक्टेयर की हैं। लेकिन अभी ये तीनों खानों चालू नहीं हो सकी हैं। खान विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इन सभी छह खानों के चलने से प्रदेश की बजरी की मांग की 25 फीसदी आपूर्ति हो सकेगी। ऐसे में शेष 75 फीसदी बजरी आपूर्ति के लिए अभी और बजरी खानों के शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।
सरकार से ये अपेक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन से रोक हटा दी है, लेकिन जब तक बनास व अन्य प्रमुख नदियों में सभी खानें चालू करने का रास्ता नहीं खुलेगा, तब तक सही मायनों में जनता को सस्ती बजरी मिलना मुश्किल होगा।
बजरी पर रोक लगी : 16 नवंबर, 2017
बजरी से रोक हटी : 11 नवंबर, 2021
-यों समझें बजरी खनन का गणित
बजरी पर रोक के समय स्थिति :
-53 कुल बजरी खानें नदियों में
-568.40 लाख टन बजरी खनन
-245.95 करोड़ रुपए राजस्व सालाना
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये होगी तस्वीर
-65 -लीज नदियों में चालू हो सकेंगी
-700 -लाख टन बजरी खनन होगा
-400 -करोड़ राजस्व सालाना मिलेगा
-06 बजरी खानों को अब तक खनन की अनुमति
पहले शुरू हो चुकी खानों में 13 माह और खनन
राज्य में वर्ष 2012-13 में नदियों में बजरी की खानों की नीलामी पांच साल (60 माह) के लिए की गई थी। इनमें पहले करीब 47 माह खनन हो चुका है। ऐसे में अब अनुमति मिलने के बाद 13 माह और खनन हो सकेगा। बजरी खनन उन्हीं खानों में चालू होगा, जिनमें केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलेगा। 13 माह की अवधि पूरी होने के बाद राज्य में इन खानों की नीलामी फिर से की जाएगी। ये खानें नदियों में 500 से 4000 हैक्टेयर तक की हैं।
सरकार बरत रही लापरवाही
सुप्रीम कोर्ट बजरी खनन से एक माह पहले ही रोक हट चुकी है, लेकिन राज्य सरकार जल्द खानें चालू कराने को लेकर लापरवाही बरत रही है। जनता का सस्ती बजरी मिलने का सपना तभी पूरा होगा जब नदियों की सभी खानें चालू हो जाएंगी।
नवीन शर्मा, अध्यक्ष ऑल राजस्थान बजरी ट्रक यूनियन
Published on:
10 Dec 2021 04:57 pm
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