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जयपुर

राजस्थान हाईकोर्ट ने लू से बचाव व राहत के लिए सरकार को चेताया, मजदूरों को दोपहर में काम नहीं करने दिए जाने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने लू और शीतलहर के कारण होने वाली मौतों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए ब्रह्माण्ड, पृथ्वी और जलवायु को बढ़ते खतरों के संदर्भ में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया है।

जयपुरMay 31, 2024 / 07:48 am

Lokendra Sainger

राजस्थान हाईकोर्ट ने लू और शीतलहर के कारण होने वाली मौतों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए ब्रह्माण्ड, पृथ्वी और जलवायु को बढ़ते खतरों के संदर्भ में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया है। कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार के साथ ही सभी नागरिकों से भावी पीढ़ी के हित में इनको बचाने का आह्वान किया, वहीं लू व शीतलहर को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए केन्द्र सरकार से कानून लाने और इससे मरने वालों के आश्रितों को मुआवजा देने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि लू से बचाव व राहत के लिए तत्काल कदमउठाए जाएं। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर गुरुवार को इस प्रकरण को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। कहा कि इस मामले में तत्काल प्रभाव से कुछ कदम उठाए जाएं और एक जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए नियमित बेंच में लगाया जाए। आदेश की कॉपी केन्द्र को भी भेजने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि 18 दिसंबर 2015 को राज्यसभा में लू और शीतलहर से मौतों के विधेयक पेश हुआ।
आज तक वह ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। इसमें प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्व तैयारी और लू व शीतलहर को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने जैसे कई प्रावधान थे। हाल केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य केन्द्रीय एजेंसियों ने लू से बचाव के लिए एडवायजरी राज्य के स्वास्थ्य विभाग को जारी की, लेकिन इस पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
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इनको बनाया पक्षकार

कोर्ट ने इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्रालय, पर्यावरण व वन मंत्रालय, चिकित्सा व परिवार कल्याण मंत्रालय, मौसम विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, श्रम व उद्योग विभाग, नागरिक व आपूर्ति विभाग, राज्य के मुख्य सचिव, एसीएस होम, राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग, एसीएस पीडब्ल्यूडी व पीएचईडी, एसीएस वन विभाग, एसीएस उद्यानिकी, एसीएस वायु प्रदूषण व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अध्यक्ष ।

दी जाए अंतरिम राहत

-लू से बचाव के उपाय लागू हों।
-सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाए।
-सड़कों पर पानी, ओआरएस व आम पन्ना की व्यवस्था की जाए।
-मजदूरों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक काम नहीं करने दिया जाए। लोगों को एसएमएस, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से अलर्ट भेजे जाएं।
-सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराएं।

जज बोले….. आज धरती तकलीफ में

न्यायाधीश ढंड ने ब्रह्मांड और पृथ्वी के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि पृथ्वी हमारे लिए भगवान का सबसे अनमोल तोहफा है। जिस तरह से मां अपने बच्चे का पोषण करती हैं। उसी तरह से धरती ने हमारा पोषण किया। इसलिए हम इसे मां कहते हैं, लेकिन आज हमें इसको बचाने के लिए अपनी भूमिका निभानी होगी। अगर हम नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ी को फलते-फूलते देखने का मौका खो देंगे।

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