
जयपुर. हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने भूखण्ड आवंटन के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण को राहत देने वाले एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। वकील के नहीं पहुंचने के कारण राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने जेडीए की अपील खारिज कर दी थी, जिस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 10 हजार रुपए जमा कराने की शर्त पर जेडीए को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण आयोग में पुन: सुनवाई का मौका दिलाया था।
आनंद विहार आवासीय योजना में भूमि आवंटन से जुड़े मामले में राजीव चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश को अपील के जरिए चुनौती दी थी, जिस पर न्यायाधीश पंकज भंडारी व न्यायाधीश भुवन गोयल की खण्डपीठ ने एकलपीठ के आदेश को पलट दिया। तथ्यों के अनुसार करीब 10 साल पहले जेडीए ने चतुर्वेदी को आनंद विहार आवासीय योजना में भूखण्ड आवंटित किया, लेकिन कब्जा नहीं सौंपा। इसे लेकर चतुर्वेदी ने राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग में परिवाद दायर किया। आयोग ने परिवादी के पक्ष में आदेश दिया। इसके खिलाफ जेडीए ने राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण आयोग में अपील दायर की, लेकिन वहां जेडीए के वकील के हाजिर नहीं होने के कारण अपील खारिज कर दी गई। जेडीए इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलते देख हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की छूट के आग्रह के साथ अपील को वापस ले लिया गया। इस मामले जेडीए ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपील बहाल कर राष्ट्रीय आयोग को पुन: सुनवाई का आदेश दिया। चतुर्वेदी की ओर से इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि हाईकोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दायर की गई, जिसके अंतर्गत राजस्थान हाईकोर्ट को उसके क्षेत्राधिकार के अधीनस्थ न्यायालयों व न्यायाधिकरणों के आदेशों पर सुनवाई का अधिकार था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुच्छेद 226 की शक्तियों का प्रयोग कर फैसला, जो गलत है। इस पर खण्डपीठ ने एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया।
Published on:
22 Feb 2024 02:21 pm
