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राजस्थान हाईकोर्ट ने आबकारी आयुक्त के आदेश को किया स्टे, लाइसेंस धारकों को मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट से शराब कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने आबकारी आयुक्त के उस आदेश को स्टे कर दिया है, जिसमें एनुअल गारंटी अमाउंट की राशि आनुपातिक आधार पर तय नहीं की गई थी।

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट से शराब कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने आबकारी आयुक्त के उस आदेश को स्टे कर दिया है, जिसमें एनुअल गारंटी अमाउंट की राशि आनुपातिक आधार पर तय नहीं की गई थी। ऐसे में आयुक्त के आदेश के बाद अनुज्ञाधारियों को विभाग ने डिमांड नोटिस भी जारी कर दिया। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने आबकारी आयुक्त के आदेश को स्टे करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। ऐसी स्थिति में विभाग जारी किए गए डिमांड नोटिस की राशि नहीं ले सकेगा। हाईकोर्ट ने यह आदेश रविंद्र सिंह की याचिका पर दिया है।

एडवोकेट आरबी माथुर एवं धीरज पालियां ने बताया कि जब शराब दुकान की बोलियां लगती है तो उस समय जितनी राशि में दुकान छूटती है, उतने ही रूपए की शराब मासिक रूप से खरीदनी होती है। ऐसे में यदि अनुज्ञाधारी उतने रूपए की शराब नहीं खरीदता है तो ऐसी स्थिति में तिमाही के आधार पर आबकारी विभाग उन्हें नोटिस जारी करता है और अंतर की राशि की शराब खरीदनी होती है या रूपए विभाग में जमा कराने होेते हैं। यदि किसी अनुज्ञाधारी की दुकान लाइसेंस मिलने के बाद महीने के बीच में शुरू होती है, तो वह आनुपातिक रूप से उतने ही रूपयों की शराब खरीदता था। लेकिन, अब आबकारी आयुक्त ने आदेश जारी कर दिया कि चाहे अनुज्ञाधारी दुकान जिस भी तारीख को खोले, उसे पूरे माह के हिसाब से शराब खरीदनी होगी। ऐसे में तिमाही पर अनुज्ञाधारियों को डिमांड नोटिस जारी कर दिए गए। जिस पर मामला हाईकोर्ट में चला गया।