
rain water harvesting
राज्य में अब न्यूनतम 150 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखंड पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य करने की तैयारी है। इतने और इससे बड़े भूखण्डधारियों को बारिश का पानी को सहेजना अनिवार्य हो जाएगा। एक साल पहले ही इसमें बदलाव कर इसके लिए भूखंड क्षेत्रफल 300 से घटाकर 225 वर्गमीटर किया गया था। नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में सभी विकास प्राधिकरण, यूआइटी व नगरीय निकायों से फीडबैक मांगा है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में भूजल स्तर की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जलदाय विभाग और भूजल विभाग ने इसकी जरूरत जताई है। अभी 225 वर्गमीटर व इससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंडों पर ही यह लागू है, जिनकी संख्या अभी करीब 10 लाख है।
भूजल की स्थिति
बड़ा सवाल: एक पर भी नहीं लगा जुर्माना, तो फिर कागजों में दिखावा क्यों
225 वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्रफल के लाखों भवन निर्मित हैं, लेकिन हार्वेस्टिंग सिस्टम 5% भवनों में ही बनाए गए। पिछले पांच वर्ष में नियमों को ताक पर रखने वाले एक भी निर्माणकर्ता से जुर्माना नहीं वसूला गया, केवल नोटिस देकर जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली गई। मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं होने से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए ही नहीं जा रहे। जब तक मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत नहीं होगा, तब कम क्षेत्रफल के भूखंड दायरे में लाने का भी प्रभावी परिणाम आने की संभावना नगण्य है। पिछले वर्ष इसे 167 वर्गमीटर से शुरुआत करने का प्रस्ताव था,लेकिन ऐसे भूखंडों पर सेटबैक में ज्यादा जगह नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। अब तो 150 वर्गमीटर करना प्रस्तावित कर रहे हैं।
मंत्री कल्ला ने उठाया था मामला: पिछले वर्ष मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में दायरे में छोटे भूखंडों को लाने पर भी चर्चा हुई थी। मंत्री बी.डी. कल्ला ने 100 वर्गमीटर व इससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंडों को भी इसके दायरे में लाने की जरूरत जताई थी।
Published on:
02 Oct 2022 09:55 pm
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