2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan: फिर विवादों में घिरे IAS नीरज के पवन, रेलवे पर ऐसे बढ़ाया करीब 22 करोड़ का अतिरिक्त भार

Rajasthan News: बीकानेर और बांसवाड़ा के संभागीय आयुक्त नीरज के पवन एक बार फिर विवादों में घिर गए है।

2 min read
Google source verification

भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी आईएएस नीरज के पवन को राज्य में विशेष रियायत मिल रखी है। पहले अशोक गहलोत सरकार ने उन्हें बीकानेर और फिर बांसवाड़ा का संभागीय आयुक्त बनाया और अब केन्द्र एवं राज्य सरकार के उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने के बावजूद वह संभागीय आयुक्त (डीसी) के पद पर तैनात हैं।

दरअसल राज्य में प्रावधान है कि ऐसा अफसर जो सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाए या गंभीर अनियमितता के मामले के आरोपी हो तो उसे फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाए। नीरज के मामले में इस निर्णय की अनदेखी कर रखी है। अभियोजन स्वीकृति देने के 6 माह बाद भी सरकार ने उन्हें बांसवाड़ा का संभागीय आयुक्त (डीसी) बना रखा है।

इस बीच बांसवाड़ा-छोटी सादड़ी-नीमच रेल परियोजना के जमीन अधिग्रहण के मामलों में विवाद सामने आने लगे हैं। नीरज बतौर डीसी इस परियोजना के मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। भूमि अवाप्ति से जुडे प्रतापगढ़ उपखंड अधिकारी के निर्णय को पलटकर रेलवे पर करीब 20 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार डालकर नीरज फिर विवादों में आ गए।

किरोड़ीलाल मीना ने लिखा था पत्र

मंत्री किरोड़ीलाल मीना ने हाल ही मुख्य सचिव सुधांश पंत को पत्र लिखकर इस ओर राज्य सरकार का ध्यान दिलाया है। पवन जहां स्वास्थ्य विभाग में रहते नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) में अनियमितता के मामले में गिरफ्तार हुए, वहीं उन पर श्रम विभाग में राजस्थान कौशल और आजीविका विकास निगम घूसकांड, जयपुर ग्रेटर नगर निगम में बीवीजी घोटाले और करौली में कलक्टर रहते नरेगा से जुड़े मामलों में भी अनियमितता के आरोप रहे। एनएचएम मामले में पहले भारत सरकार और फिर राजस्थान सरकार ने इसी साल फरवरी में अभियोजन स्वीकृति दी।

रेलवे एक्टिव मोड में…

रेलवे ने न केवल नीरज के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर ली है, बल्कि संभागीय आयुक्त के सामने पैरवी करने वाले अपने वकील को लेकर भी असंतोष जाहिर किया। इसके बाद परियोजना के लिए अवाप्ति से जुड़े शेष मामलों में रेलवे की पैरवी के लिए नया वकील भी लगा दिया है।

यह भी पढ़ें : फोर-व्हीलर मालिकों को अब नहीं मिलेगा ‘मुफ्त’ का राशन, आदेश जारी

चिंता इस बात की…

परियोजना के लिए अवाप्ति से जुड़े करीब 125 और मामले संभागीय आयुक्त नीरज के पवन द्वारा ही सुने जाने हैं, ऐसे में रेलवे की चिंता है कि यदि 18 मामलों की तरह ही भविष्य की सुनवाई हुई तो इस परियोजना पर बड़ा आर्थिक भार आएगा।

मुआवजा बढ़ाकर किया 22.32 करोड़

नीरज से जुड़ा ताजा विवाद बांसवाड़ा में सामने आया है। इसमें छोटी सादड़ी-नीमच रेल परियोजना के लिए अवाप्ति के 18 मामलों में कृषि भूमि मानते हुए प्रतापगढ़ के उपखण्ड अधिकारी ने 2 करोड़ 8 लाख 9 हजार 679 रुपए मुआवजा तय किया। नीरज ने मई 2024 में इसी भूमि को आवासीय बताते हुए मुआवजा राशि 20 करोड़ रुपए बढ़ाकर 22 करोड़ 32 लाख 98 हजार 327 रुपए कर दी। रेलवे इस मामले में कह रहा है कि अवाप्ति प्रक्रिया शुरू होने तक भूमि कृषि किस्म की थी और उसके एक सप्ताह के भीतर इसका भू-रूपान्तरण करवाकर इसे आवासीय करवा लिया।

यह भी पढ़ें : Holiday: स्वतंत्रता दिवस से रक्षाबंधन तक 4 दिन की छुट्टी, ट्रेनों में वेटिंग-हवाई सफर हुआ इतना महंगा