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राजस्थान का रण : अनोखी है यह विधानसभा, बरसों से यहां जीतने वाले की नहीं बनती सरकार

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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 29 Sep 2018, 7:15 AM IST

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राजस्थान का रण : अनोखी है यह विधानसभा, बरसों से यहां जीतने वाले की नहीं बनती सरकार

शादाब अहमद / जयपुर. प्रदेश की राजधानी जयपुर को देश की राजधानी दिल्ली को जोडऩे वाले नेशनल हाइवे स्थित कोटपूतली कस्बे एवं विधानसभा क्षेत्र की सूरत और सीरत ठीक नहीं है। यहां विकास के आगे जातिगत राजनीति हावी है। जिसके चलते विकास कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका। यही वजह है कि 33 साल में हुए 7 चुनावों में प्रदेश में चली किसी पार्टी विशेष की लहर का असर भी यहां देखने को नहीं मिला।


कोटपूतली में प्रवेश करते ही हर कोई यहां की बदहाल सडक़ों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था से परेशान हो उठता है। जैसे-जैसे कस्बे के भीतर जाते हैं तो हालात बद से बदतर होने लगते हैं। कहने को सडक़ों पर डिवाइडर हैं, लेकिन इन पर दुकानें सजती है। टूटी-फूटी सडक़ों पर उड़ती धूल इस कस्बे की पहचान बन गई है। किराने की दुकान चलाने वाले बुद्धाराम बताते हंै कि लोग समस्याओं से त्रस्त हैं, लेकिन कोई नेता विकास की बात कोई नेता नहीं करता है। चुनाव में उम्मीदवार भी जातिगत आधार पर ही तय किए जाते रहे हैं। क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके धूड़सिंह शेखवात का कहना है कि अतिक्रमण और अवैध खनन के चलते साबी नदी का अस्तित्व ही समाप्त होने के कगार पर है। क्षेत्र में भूजल नीचे चला गया है। ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

एक सरकार ने किया मंजूर, दूसरी ने निरस्त
केन्द्र में यूपीए सरकार के समय कोटपूतली समेत प्रदेश के 26 कस्बों की सीवरेज परियोजना के लिए जवाहरलाल नेहरू अरबन रिनुऊल मिशन के तहत 2071 करोड़ रुपए के टेंडर अगस्त 2013 में जारी किए गए थे। केन्द्र सरकार ने 24 दिसम्बर 2013 को इसकी मंजूरी जारी कर दी। इसमें 59.47 करोड़ रुपए कोटपूतली के लिए मंजूर किए गए थे। इसके बाद पहले राज्य और फिर केन्द्र में भाजपा की सरकार आ गई। केन्द्र सरकार ने इस परियोजना के लिए राशि जारी नहीं की और 11 दिसंबर 2014 को कोटपूतली सीवरेज परियोजना को निरस्त कर दिया गया।

दावा पक्की सड़क का
सरकार का दावा है कि कोटपूतली क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में पक्की सडक़ है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। द्वारिकापुरा से जीनगोर गांव की खस्ताहाल सडक़ सरकार के दावों की पोल खोल रही है।
यहां गढ्ढे गहरे तथा दस से पन्द्रह फीट लंबाई-चौड़ाई के हैं जिससे कार, बाइक सवारों को खासी परेशानी होती है। इस सडक़ से गुजर रहे मेवाराम ने बताया कि यह सडक़ एक-डेढ़ साल से ऐसी ही हैं। विधायक हो या सरपंच कोई हमारी नहीं सुनता है। विधायक राजेन्द्र सिंह यादव ने यह मामला विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी।

जिले की आस अधूरी
इस कस्बे की जिला मुख्यालय से 100 किमी से अधिक दूरी होने से इसकी उपेक्षा होती है। क्योंकि जिले के अधिकारियों का ध्यान जयपुर और उसकी परिधि के इलाकों तक ज्यादा रहता है। कोटपूतली को अलग जिला बनाने मांग लंबे समय से चल रही है। जिला बनने के बाद यहां विकास की गति तेज हो सकेगी।

पढ़ाई छोडऩे को मजबूर बालिकाएं
क्षेत्र के 10 हजार की आबादी वाले दांतिल गांव में बालिकाओं के लिए आठवीं ऊपर का सरकारी स्कूल व कॉलेज नहीं है। जनरल स्टोर चलाने वाले प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि गरीब बालिकाएं मजबूरी में पढ़ाई छोड़ देती हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए कोटपूतली या जयपुर जाना पड़ता है। गांव से रोडवेज की सिर्फ एक और निजी दो बसें चलती है। परिवहन साधनों का टोटा है। चुनाव में सत्ता के साथ नहीं जाने के लिए भी वह जातिवाद को जिम्मेदार मानते हैं।

याद आते हैं मुक्तिलाल
स्वतंत्रता सैनानी मुक्तिलाल मोदी कोटपूतली से दो बार विधायक रहे। पहली बार वह 1962 में कांग्रेस से और दूसरी बार 1985 में निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीते। यहां के राम कुमार का कहना है कि वह विधायक रहे या नहीं, इसका कभी महत्व नहीं रहा। कस्बे में आज अस्पताल, कॉलेज है यह उनकी मेहनत का फल है। कन्या महाविद्यालय खोलने के लिए सरकार ने 30 लाख रुपए जमा कराने और भामाशाह से इसके लिए भवन बनाने की शर्त रखी थी। इस कॉलेज को बनाने के लिए मोदी खुद का जयपुर स्थित मकान को गिरवी रखने को तैयार थे। हालांकि दो माह में यह राशि एकत्र कर ली और भामाशाह लक्ष्मीनारायण मोरजीवाला ने कॉलेज भवन बनवाया।

कौन कब रहा विधायक

चुनाव---------विधायक (पार्टी)------------------सत्ताधारी दल

1985---------मुक्तिलाल (निर्दलीय)-------------कांग्रेस
1990---------रामकरण सिंह (निर्दलीय)---------भाजपा
1993---------रामचंद्र रावत (कांग्रेस)-------------भाजपा
1998---------रघुवीर सिंह (भाजपा) --------------कांग्रेस
2003---------सुभाषचंद्र (निर्दलीय) --------------भाजपा
2008---------रामस्वरू कसाना (लोसपा) ---------कांग्रेस
2013---------राजेन्द्र सिंह यादव (कांग्रेस)---------भाजपा