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राजस्थान का रण: नवाबों के शहर टोंक में बोली महिलाएं, काम नहीं तो वोट नोटा को, तीन तलाक को बताया निजी मसला

जया गुप्ता की रिपोर्ट  

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जयपुर

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Abdul Bari

Oct 17, 2018

rajasthan ka ran tonk Ground report

नवाबों के शहर टोंक में बोली महिलाएं, काम नहीं तो वोट नोटा को, तीन तलाक को बताया निजी मसला

चुनाव की सरगरर्मीं के बीच आधी आबादी का मन टटोलने के लिए मैं निकल पड़ी राजधानी से सौ किलोमीटर दूर नवाबों के शहर के नाम से प्रसिद्ध टोंक के लिए। मुस्लिम बहुल शहर में महिलाएं राजनीति बात करेंगी या नहीं? ये सवाल मन में लिए मैं टोंक बस स्टैंड पर खड़ी थी। स्टैंड से बाहर आते ही देखा कि नई सड़क बन रही थी, ऑटो वाले से पूछ लिया, भैया सड़क तो बढिय़ा बन रही है। ऑटो वाले ने भी मजाकिया अंदाज में कहा, मैडम जी आप खुशनसीब हो। दस दिन पहले ही सीएम मैडम की सभा हुई थी। उसी रूट में यह भी शामिल थी। चुनाव से एक महीने पहले ही सड़क बनती है। बाकी चार साल से अधिक वक्त बड़े-बड़े गड्ढे ही रहते है। टोंक में लोकल ट्रांसपोर्ट के नाम पर केवल ऑटो हैं। बसें नहीं चलती।

घंटाघर से बड़ा कुएं की तरफ चले तो एक हकीम साहब की दुकान पर महिलाओं की भीड़ थी। सो मैं भी जा पहुंची महिलाओं के बीच। जैसे ही राजनीति की चर्चा छेड़ी, सारी एक साथ बोल पड़ी पांच साल हो गए, कोई नेता दिखाई नहीं दिया। अब आएंगे वोट मांगने। बीसीए में पढ़ रही मेहनाज बोलीं, मैं तो नोटा बटन दबाऊंगी। ये नेता लोग कोई काम नहीं करते। यहां से हम शाही जामा मस्जिद से होते हुए काली पलटन मोहल्ले में पहुंचे। यहां नजीम भाई के घर 15-20 महिलाएं जमा थी। चुनाव की बात छेड़ी तो 33 साल की सादिया बोली, 7 दिसंबर को वोट डालने जाना है। पिछली बार मोदी से उम्मीदें थी। मैंने भी मोदी को वोट दिया था, हुआ कुछ भी नहीं। अब तक पानी भी नहीं आया। दो दिन में एक बार पानी आ रहा है। पीछे से सलमा खान ने भी कहा कि दस साल से टोंक को मीठा पानी देने के वादे कर रहे हैं। जिस पानी से नेता नहाएं भी नहीं, उसे पीना हमारी मजबूरी है। 66 साल की सलमा बी बोलीं कि जीएसटी ने इतनी महंगाई बढ़ा दी है कि पूछो ही मत। दुकानदार ने अंडे पर भी जीएसटी लगा दिया है।

कोई इनसे पूछे, मुर्गी भी जीएसटी देखकर अंडा देती होगी भला। अम्मा के बोलते ही सारी औरतें खिलखिलाकर हंस पड़ी। अम्मा बोली, 2 रुपए किलो में मिलने वाला गेहूं भी बंद हो गया। बीड़ी बनाकर पेट पाल रही हूं। स्वच्छ भारत अभियान की बात छेड़ी तो महिलाओं ने कहा कि कचरे की गाडिय़ां आने से ये आराम तो हो गया है। बीच में नुसरत बोली कि अब भी कई घरों में शौचालय नहीं है। लोग नालियों और खुले में ही शौच कर रहे हैं। अस्पतालों की बात पर खदीजा खानम ने कहा, जरा-जरा सी बीमारी में डॉक्टर जयपुर रैफर कर देते हैं। यहां सीटी-स्कैन की मशीनें भी नहीं है। दवाइयां मिलती नहीं। प्राइवेट अस्पतालों में अच्छी सुविधा नहीं है। जयपुर ही जाना पड़ता है। 20 साल की नेहा अंजुम बोलीं कि इन सबसे तो फिर भी काम चला रहे हैं, लेकिन यहां कॉलेज की बड़ी कमी है। मुझे मेडिकल में जाना है। जयपुर या दूसरे जिलों में जाना पड़ेगा। जब तक ये सुविधा नहीं होगी, मैं तो नोटा का ही बटन दबाऊंगी। मैंने पूछा, अब्बा ने किसी और को वोट देने को कहा तो? सारी औरतें ही बोल पड़ी, हमारे यहां ऐसा नहीं होता। वोट अपनी मर्जी से ही देते हैं।

महिलाओं को चर्चा में डूबा हुआ पाकर मैंने लगे हाथ तीन तलाक की बात भी छेड़ दी। इस मामले पर महिलाएं एकमत ही दिखीं। बोलीं-ये हमारा मामला है। सरकार इसमें दखलअंदाजी क्यों करती है। संविधान ने धार्मिक स्वतंत्रता दी है। हम अपने मामले खुद निपटा लेंगे। मैंने पूछा, इसका असर चुनाव पर भी दिखेगा क्या? तो बोलीं ये दोनों मामले अलग हैं। वोट तो महंगाई कम करने से ही मिलेंगे। कालीपलटन से अब मोतीबाग पहुंचे तो यहां कुछ दलित समाज के घर थे। बस्ती अलग थी, मगर परेशानियां एक जैसी ही थी। 60 साल की नर्मदा देवी ने कहा, जो हमारे घरों तक मीठा पानी पहुंचाएगा और सडक़ बनवा देगा, उसी को वोट देंगे। पास में खड़ी अनिता बंशीवाल बोलीं, आगे स्कूल है। वहां लड़के बैठे रहते हैं। आती-जाती लड़कियों को छेड़ते हैं। कोर्ई कुछ नहीं करता।

पुलिस भी नहीं आती। सामने आवारा पशु घूम रहे थे। उन्हें देखकर फिर कहा, सरकार ने करोड़ों रुपए लगाकर कामधेनु सर्किल बना दिया। उतने में तो गौशाला बन जाती। हमें बातचीत करता देख पास के घर के 65 साल की कांता देवी निकल कर आई। उन्हें लगा कि सरकार की तरफ से आए हैं। रोते-रोते बोलीं, मैं विधवा हूं। सात साल से बीपीएल आवास के लिए भटक रही हूं।

कुछ आगे बढ़े तो भाजपा-कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं से मुलाकात हो गई। विकास के मुद्दे पर दोनों एक बात से सहमत हुई कि हमारी कॉलोनी में विकास नहीं हुआ। भाजपा कार्यकर्ता बोलीं कि दस साल से पार्टी के मजबूत कार्यकर्ता हैं। लेकिन विधायक हमारी सुनते ही नहीं। जिले में चारों विधायक, सांसद, नगर सभापति सभी हमारी पार्टी से ही हैं। फिर भी एक-दूसरे से बनती नहीं। एक महिला बोली, मैडम आपको पता है गौरव यात्रा वाली सभा में भी मैं नहीं गई। इस बार भी इन्हीं विधायकों को टिकट मिला तो मैं अपनी ही पार्टी को वोट नहीं दूंगी।

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