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विद्वानों ने जताई कर्मकाण्ड, हस्तरेखा विज्ञान व ज्योतिष शिक्षा की जरूरत

Rajasthan Mission 2030: संस्कृत महाविद्यालयों में कर्मकाण्ड, हस्तरेखा विज्ञान, ज्योतिष और वास्तु शिक्षा की जरूरत जताई जा रही है। इसके लिए महाविद्यालयों में नियमित रूप से शिविरों को आयोजन करने के साथ परामर्श केन्द्रों की स्थापना होनी चाहिए।

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विद्वानों ने जताई कर्मकाण्ड, हस्तरेखा विज्ञान व ज्योतिष शिक्षा की जरूरत

विद्वानों ने जताई कर्मकाण्ड, हस्तरेखा विज्ञान व ज्योतिष शिक्षा की जरूरत

जयपुर। संस्कृत महाविद्यालयों में कर्मकाण्ड, हस्तरेखा विज्ञान, ज्योतिष और वास्तु शिक्षा की जरूरत जताई जा रही है। इसके लिए महाविद्यालयों में नियमित रूप से शिविरों को आयोजन करने के साथ परामर्श केन्द्रों की स्थापना होनी चाहिए। विद्वानों ने यह जरूरत राजस्थान मिशन 2030 के तहत गांधी नगर के आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित 'परिसंवाद-कार्यक्रम' में जताई।

प्रभारी प्राचार्य व संयुक्त निदेशक डॉ. शालिनी सक्सेना ने बताया कि कार्यक्रम में वर्तमान दौर में संस्कृत को जन-जन तक कैसे पहुंचाया जाये, इस पर मंथन किया गया। वहीं ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षण को समाज के लिए जरूरी बताया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में संस्कृत जगत से जुड़े विद्वान, वर्तमान व पूर्व छात्र, छात्रों के अभिभावक, कार्मिक ऑनलाइन शामिल हुए।

इन पर भी हुई चर्चा
संस्कृत शिक्षा में अनुसंधान और शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कम्प्यूटर शिक्षा का ज्ञान अनिवार्य हो।
संस्कृत शिक्षा में उच्च अध्ययन के लिए प्रत्येक जिलें में कम से कम 2 संस्कृत महाविद्यालयों की स्थापना होनी चाहिए। पहले से संचालित शास्त्री संस्कृत महाविद्यालयों को आचार्य महाविद्यालयों में क्रमोन्नत किया जाना चाहिए।
हर जिले मे एक आदर्श आवासीय संस्कृत विद्यालय की स्थापना होनी चाहिए।
सभी भर्ती परीक्षाओं में संस्कृत की अनिवार्यता लागू होनी चाहिए।
संस्कृत ग्रंथों और पाण्डुलिपियों को डिजिटल फार्म मे उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।