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बॉर्डर पर वसुंधरा सरकार का बड़ा सियासी दांव, अब होगा जमीन आवंटन

कैबिनेट सर्कुलेशन से किया प्रस्ताव पारित, इससे पहले 2008 में भी भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले हटाई थी रोक, तब 27 हजार से अधिक आवेदन आए थे, अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 25 अगस्त 2009 को फिर लगाई रोक

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Video...Cm vasundhra Body language change in this rally

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जयपुर. राज्य सरकार ने पाकिस्तान सीमा से लगे जैसलमेर जिले में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के दूसरे चरण की बारानी भूमि आवंटन पर गत करीब नौ साल से लगी रोक हटाकर बड़ा सियासी दांव खेला है। कैबिनेट ने मंगलवार को सर्कुलेशन से इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब जैसलमेर जिले में अगले कुछ दिनों में जमीन आवंटन के लिए आवेदन लेने का काम शुरू होगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जैसलमेर में राजस्थान गौरव यात्रा के दौरान 24 अगस्त को जमीन आवंटन से रोक हटाने की घोषणा की थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट के समक्ष पेश किया। मंगलवार शाम को कैबिनेट सर्कुलेशन से इसको मंजूरी दे दी गई। अब जिलावासियों को जमीन आबंटित करने का रास्ता खुल गया है। गौरतलब है कि जैसलमेर जिले में लाखों-करोड़ों बीघा बारानी भूमि उपलब्ध है। सरकार के इस निर्णय से जहां लोगों को यह जमीन मिल सकेगी, वहीं अस्पताल, स्कूल्स, कार्यालयों, सडक़ व
रेल लाइन के लिए भी बारानी भूमि देना अब संभव होगा। जमीन आवंटन नियमों के तहत उपनिवेशन आयुक्त जैसलमेर को करना होगा।

ऐसे चलता रहा खेल
1976 से जैसलमेर में बारानी भूमि आवंटन पर रोक थी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनके पिछले कार्यकाल में भी चुनाव से ठीक पहले 18 अगस्त 2008 को इस रोक को हटाया था। इसके बाद करीब 27 हजार से अधिक आवेदन सरकार के पास आए थे। हालांकि दिसम्बर 2008 में प्रदेश में सरकार बदल गई और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बन गए। गहलोत ने 25 अगस्त 2009 को बारानी जमीन आवंटन पर फिर रोक लगा दी। इसके चलते आवंटन के लिए आए सभी आवेदन खारिज कर दिए गए।

लंबे समय से चल रही मांग
जिले के भाजपा नेताओं व लोगों ने बार-बार भूमि आवंटन से रोक हटाने के लिए मांग उठाई और जनवरी में हजारों जिलावासियों ने इसे लेकर प्रदर्शन भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया।