राजस्थान में चल रहे सियासी संकट का भाजपा को भी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार ने सौम्या गुर्जर को महापौर पद से हटाकर भाजपा की शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाया है। आज शुभ मूहूर्त में पूरे विधि-विधान से शील धाभाई ने पदभार ग्रहण किया। हालांकि उनकी ज्वाइनिंग में विधायक कालीचरण सराफ के अलावा कोई बड़ा नेता या पदाधिकारी नजर नहीं आया।पदभार ग्रहण करने के बाद धाभाई ने ने कहा कि दिवाली पर जैसे हर बाजार जगमग होता है, उसी तरह मेरा प्रयास रहेगा कि शहर की हर गली-मोहल्ला जगमग हो। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाना मेरी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से किसी भी तरह के मनमुटाव से इनकार किया और कहा मैं जब भी महापौर पद पर रही सभी अधिकारियों के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे हैं। मेरा फोकस व्यवस्थाओं को सुधारने और पहले से ज्यादा अच्छा काम करने पर रहेगा। मौजूदा कार्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभी शहर में सफाई व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब है, जिसे ठीक करना मेरी पहली प्रायोरिटी है।
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कांग्रेस से अच्छे तालमेल का मिला तोहफा
धाभाई को दोबारा कार्यवाहक महापौर की जिम्मेदारी इसलिए मिली है, क्योंकि उनका कांग्रेस नेताओं के साथ अच्छा तालमेल है। पूर्व में जब वे कार्यवाहक महापौर थी, तब कांग्रेस पार्षदो को कोई शिकायत नहीं थी। हालांकि उस समय भाजपा पार्षदों ने धाभाई के खिलाफ मोर्चा खोल लिया था। इसे लेकर भाजपा संगठन को बैठक बुलानी पड़ी थी। धाभाई को वसुंधरा राजे का नजदीकी माना जाता है। उनकी सिफारिश पर ही धाभाई को कोटपूतली से टिकट मिला था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।