
सुरेंद्र डैला/ चिड़ावा(झुंझुनूं)।
दिल की बात चलती है तो अमूमन हाथ उठकर छाती के बायीं ओर चला जाता है, लेकिन तोला सेही गांव के 42 वर्षीय राकेश मेघवाल के साथ ऐसा नहीं है। उसका दिल बाएं नहीं बल्कि दायीं तरफ धड़कता है। इतना ही नहीं राकेश के शरीर के अन्य अंग भी उलट दिशा में है। राकेश को इसका पता तब चला, जब वह आरएसी (राजस्थान सशस्त्र बल) में भर्ती के लिए श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल में मेडिकल करवाने गया।
जब डॉक्टर ने उसकी ईसीजी कराई तो पहली बार ईसीजी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने कम्पाउंडर को डांट लगाई और कहा तुझे ईसीजी करनी ही नहीं आती। लेकिन दुबारा ईसीजी कराई तो डॉक्टर चौंक गया। उसने राकेश से कहा कि तुम्हारा दिल दायीं तरफ है। तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता, तुम आरएसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। यह सुनकर राकेश घर आ गया और आरएसी में जाने का सपना देखना छोड़ दिया।
फिटिंग, सिलाई व पेंटिंग का शौक
राकेश ने बताया कि वर्ष 1998-99 में श्रीगंगानगर में आरएसी (राजस्थान आर्म्ड कोर) के लिए कराए गए मेडिकल के दौरान उसे पता चला कि दिल उल्टी तरफ है तो फिर खुद का काम करने की सोची। राकेश ने आठवीं तक की पढ़ाई की है। वह बिजली-पानी फिटिंग, सिलाई, पेंटिंग, फोटोग्राफी, चेजा मिस्त्री सहित अन्य काम कर लेता है। राकेश के एक बेटी और दो बेटे हैं।
कभी नहीं हुआ बीमार
राकेश ने श्रीगंगानगर में जांच करवाने के बाद अन्य जगह भी जांच करवाई। इनमें उनके हार्ट, लीवर समेत अन्य अंग विपरित दिशा में बताए गए। इसके बावजूद वह कभी भी गंभीर रूप से बीमार नहीं हुआ है।
लाखों लोगों में से एक में ऐसी स्थिति होती है। जींस में गड़बड़ी की वजह से भ्रूण के समय ही अंग वितरित दिशा में विकसित होने लगते हैं। ऐसे लोग भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। - डॉ.जितेंद्र यादव, प्रभारी, रा. प्रा. स्वास्थ्य केंद्र, अरड़ावता
Published on:
26 Jul 2023 03:17 pm
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