
जयपुर।
राजस्थान रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को 16 दिन हो रहे हैं, लेकिन सरकार और हड़ताली कर्मचारियों के बीच गतिरोध ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच राजधानी जयपुर से आई एक खबर ने हड़कंप मचा दिया। दरअसल, रोडवेज के एक रिटायर्ड कर्मचारी ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। रोडवेज हड़ताल के दौरान किसी कर्मचारी के सुसाइड करने का संभवतया ये पहला मामला है।
जानकारी के अनुसार रिटायर रोडवेज कर्मी ने जयपुर के सिविल लाइन्स फाटक के नज़दीक ट्रेन के आगे छलांग लगा डाली। इस दौरान उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रारम्भिक जानकारी में सामने आया है कि रोडवेज का ये रिटायर्ड कर्मचारी रिटारमेंट की राशि नहीं मिलने से परेशान चल रहा था। मृतक की शिनाख्त वीरेंद्र सिंह के तौर पर हुई है। अशोक नगर थाना पुलिस ने फ़िलहाल शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर पड़ताल शुरू कर दी है।
परिवहन माफियाओं की जेब में गई 100 करोड़ की कमाई!
प्रदेश में रोडवेज हड़ताल का 16वां दिन है और अब तक हड़ताली कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच वार्ता के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भामस से संबद्ध संगठनों व सयुंक्त मोर्चा ने रोडवेज बसों के ***** जाम से प्रदेश के परिवहन माफिया की जेब में करीब सौ करोड़ की कमाई जाने का अनुमान जताते हुए सरकार पर असवेंदनशीलता का आरोप लगाया है।
राजस्थान परिवहन निगम सयुंक्त कर्मचारी फेडरेशन एवं सेवानिवृत कर्मचारी महासंघ से संबद्ध भामस का बीते छह सितंबर से क्रमिक व 13 सितंबर से आमरण अनशन जारी रहा। फेडरेशन व सयुंक्त मोर्चा पदाधिकारियों ने सरकार पर असंवदेनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि रोडवेज बसों के चक्काजाम से बीते 15 दिन में प्रत्यक्ष रूप से परिवहन माफिया की जेब में करीब सौ करोड का राजस्व जा चुका है।
वहीं रोडवेज बस अड्डों व बस आवागमन से लाखों लोगों की रोजीरोटी पर संकट खड़ा है लेकिन अब तक सरकार ने इस मामले में कोई पहल नहीं की है। सिंधी कैंप बस स्टैंड से रोजाना रवाना होने वाली 1300 बसों के चक्के थमे हुए हैं और एक दिन की औसत आय करीब 35 लाख रुपए की गणना में अब तक करीब पौने 4.50 करोड़ रुपए आय का नुकसान हो चुका है।
बीते रविवार को रोडवेजकर्मियों ने जयपुर में मांगकर 3364 रुपए एकत्रित किए हैं। वहीं प्रदेशभर में एकत्रित अनुमानित राशि करीब 13 हजार रुपए अगले एक दो दिन में मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कराने की बात मोर्चा पदाधिकारियों ने कही है।
एटक प्रदेशाध्यक्ष एमएल यादव ने कहा कि हड़ताल पर सरकार की हठधर्मिता अब तक बनी हुई है मानों सरकार रोडवेज चलाने की बजाय प्राइवेट बस आॅपरेटरों के हाथ की कठपुतली बन गई है। रोडवेज बसों का लगातार 16 दिन से चक्काजाम है और आमजनता परेशान है बावजूद इसके सरकार की मनमानी के चलते अब तक रोडवेज हड़ताल बेनतीजा रही है।
Published on:
02 Oct 2018 01:26 pm
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