
जयपुर. लग्जरी गाड़ियों के शौकीन लोगों की चर्चा तो आपने सुनी ही होगी लेकिन यहां हम आपको बताने जा रहे हैं गाडी के नंबरों की ऐसी दीवानगी देखने को मिली कि राजधानी में एक व्यक्ति ने 3 लाख की गाड़ी के लिए 6 लाख का वीआईपी नंबर लिया।
झालाना स्थित प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ( RTO ) में शुक्रवार को नई पंजीयन सीरीज के वीआईपी नंबर ( VIP Number Resgistration ) की बोली लगी। कुछ ही देर में यह बोली चर्चा का विषय बन गई। इस दौरान एक व्यक्ति ने 3 लाख की गाड़ी के लिए सर्वाधिक सवा 6 लाख रुपए देकर वीआईपी नंबर आरजे 45 सीएम 0001 ( RJ 45 CM 0001 ) प्राप्त किया।
DTO धर्मपाल सिंह आशीवाल ने बताया कि चौपहिया वाहनों (5 Seater) के लिए खुली नई पंजीयन सीरीज के लिए वीआईपी नंबर की नीलामी की कार्रवाई हुई। 0001 नंबर के लिए 1,01,000 का डिमांड ड्राफ्ट लगाकर 4 लोगों ने आवेदन किया। चारों आवेदकों के वाहनों में लग्जरी कार शामिल थी।
वहीं, 3,लाख रुपए कीमत वाली कार के मालिक संजय ने 5 लाख 21 हजार की सर्वाधिक बोली लगाकर आरजे 45 सीएम 0001 नंबर हासिल किया। उसने 1,01,000 के डिमांड ड्राफ्ट और बोली के 5,21,001 रुपए यानी कुल 6 लाख 22 हजार रुपए अदा कर नंबर लिया। इस दौरान मौजूद सभी लोगों के लिए ये बेहद ही चर्चा का विषय बन गया।
150 रुपए में की ढाबे पर नौकरी, 1.5 करोड़ की कार के लिए 16 लाख का नंबर..
चूंकि हम आपको गाडी के VIP नंबर के शौक के बारे में बता रहे हैं तो ऐसा ही एक मिलता-जुलता वाकया सामने आता है साल 2018 के मई महीने का...यह खबर आपको चौंका सकती है साथ ही जिंदगी में कुछ करने के लिए प्रेरित भी कर सकती है।
आपको सुनकर हैरानी होगी कि जिस व्यक्ति ने 15 साल पहले ढाबे पर मात्र 150 रुपए की नौकरी की, उसी व्यक्ति ने अपनी डेढ़ करोड़ की लग्जरी कार के लिए 16 लाख का आरजे 45 सीजी 001 नंबर खरीदा। ये व्यक्ति हैं स्वेज फॉर्म में रहने वाले राहुल तनेजा...
तनेजा ने इससे पहले भी 2011 में अपनी बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज के लिए 10 लाख का वीआईपी 0001 खरीदा था। परिवहन अधिकारियों के मुताबिक अभी तक प्रदेश का सबसे महंगा नंबर है।
राहुल की अभी एक इवेंट मैंनेजमेेंट कंपनी है। मध्यप्रदेश के कटला के रहने वाले राहुल के पिता टायर पंचर लगाने का काम करते थे। जिन्दगी में कुछ कर गुजरने के लिए छोटी उम्र में घर छोड़कर जयपुर आ गए। जहां आदर्शनगर में एक ढाबे पर 150 रुपए में नौकरी की। नौकरी करते हुए राहुल ने राजापार्क स्थित आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ाई भी की। दोस्तों की किताब, कॉपी और पासबुक्स मांगकर पढ़ाई की और 92 प्रतिशत अंक हासिल किए।
राहुल के अनुसार दो साल तक ढाबे पर नौकरी के बाद दीवाली पर पटाखे और होली पर रंग तो मकरसंक्रान्ति पर पतंगें बेचने का काम किया। रोजी-रोटी के लिए घर-घर तक अखबार पहुंचाया और फिर रात को ऑटो चलाया।
दोस्तों के कहने पर मॉडलिंग का चस्का लग गया और एक फैशन शो में भाग ले लिया। वर्ष 1998 में जयपुर क्लब के एक फैशन शो में भाग लिया और वे चुन लिए गए। इस दौरान 8 महीने तक फैशन शो किए। इसके बाद उन्होंने बैक स्टेज आने का निर्णय लिया। इसका मतलब उन्होंने इवेंट कराने का काम शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने इवेंट मैनेजमेंट कंपनी खोल ली। फिर उन्होंंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलता हासिल की।
तनेजा को नंबर 01 की इतनी चाहत है कि वे इस नम्बर से जुड़ा हर काम करना चाहते हैं। इसके लिए पहले भी एक गाड़ी के लिए एक नम्बर हासिल कर चुके हैं। दस अंकोंं के मोबाइल में 1 नम्बर सात बार हैं। चारों कार के नम्बर भी एक ही डिजिट में है।
Published on:
06 Jul 2019 07:31 pm

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