-सीएम गहलोत विधानसभा में बुधवार सुबह 11 बजे करेंगे पेश
-कई वर्गों को मिल सकती है राहत
-राजे सरकार छोड़ गई 3,09,385 करोड़ रुपए का ऋण
-किसान कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते से बढ़ गया मर्ज
जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार को सुबह 11 बजे विधानसभा में वर्तमान सरकार का पहला बजट पेश करेंगे। वर्ष 2019—20 के इस बजट में वित्तीय मसलों के साथ सियासी मांगों और वादों को जगह मिलना तय है। राजस्थान का बजट कैसा हो, इसके लिए सीएम गहलोत ने कई बैठकें कर विभिन्न संगठनों, विशेषज्ञों और सेक्टर आधारित अनुभवी व्यक्तियों की राय जानी है। गहलोत सरकार इस समय आर्थिक प्रबंधन पर फोकस कर रही है। आय के मुकाबले खर्च सीमा में इजाफा हो रहा है। इसका साफ असर बजट में भी देखने को मिल सकता है। राजस्थान की गहलोत सरकार के वर्तमान कार्यकाल का यह पहला पूर्णकालिक बजट है। उधर, अंतरिम बजट में गहलोत सरकार ने जिस तरह अपने चुनाव घोषणा-पत्र पर अमल के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई थी, उससे साफ है कि अब पूर्ण बजट भी कांग्रेस के जनघोषणा-पत्र पर ही केंद्रित होगा। केंद्र की भाजपा और प्रदेश की कांग्रेस सरकार के बीच वैचारिक टकराव के चलते स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाने की आशंका है। किसान कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते के चुनावी वादे पर अमल के चलते बजट राशि का एक बड़ा हिस्सा जन लोकप्रिय योजनाओं के भेंट चढ़ गया। अंतरिम बजट से शुरू हुआ यह खेल अब पूर्ण बजट में भी अपना रंग दिखाएगा।
-खाली खजाना
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतरिम बजट में दावा किया था कि वर्ष 2013-14 में हमारी सरकार के समय तक राज्य पर कुल कर्जभार 1,29,910 करोड़ रुपए का था। वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमान के अनुसार ऋण एवं दायित्व लगभग 138 प्रतिशत बढ़कर 3,09,385 करोड़ अनुमानित है।
-प्रदेश पर कर्ज
2017-18 (वास्तविक) : 2,81,182.05 करोड़ रुपए।
2018-19 (पुनरीक्षित प्राक्लन) : 3,09,385.06 करोड़ रुपए।
2019-20 (बजट प्रावधान) : 3,39,368.06 करोड़ रुपए।
-लाइलाज मर्ज
वर्ष 2011-12 से 2014 की अवधि में कांग्रेस की तत्कालीन गहलोत सरकार के कार्यकाल में प्रतिवर्ष कर्ज जीडीपी अनुपात 24-25 प्रतिशत रहा। वित्तीय वर्ष 2019-20 के अंत में बकाया कर्ज की राशि का अनुमान 3.38 लाख करोड़ रुपए है, जो जीडीपी का लगभग 34 प्रतिशत बैठ रहा है।
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-वर्तमान स्थिति
-राजकोषीय घाटा जीडीपी का तीन प्रतिशत
-बकाया कर्ज राशि 3.38 करोड़ रुपए, जो जीडीपी की 33.96 प्रतिशत
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-फ्लैश बैक : अंतरिम बजट
– 12 फरवरी, 2019 को गहलोत ने पेश किया था अंतरिम बजट
– वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आरंभिक चार माह का बजट
– लोकसभा चुनाव के चलते केंद्र और राज्य में आया अंतरिम बजट
– अप्रेल, मई, जून तथा जुलाई माह के लिए बजट प्रावधान
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-प्रमुख चुनौतियां
– बढ़ता राजस्व एवं राजकोषीय घाटा पर नियंत्रण
– किसान कर्ज माफी के लिए धन
– बेरोजगारी भत्ते के लिए धन
– केंद्र की भाजपा सरकार से पटरी बैठाना
– विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना
– रोजगार के नए अवसर सृजित करना
– पेयजल की उपलब्धता
– रिफाइनरी के जरिए राजस्व
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-बजट से उम्मीदें
-साल 2019-20 से औद्योगिक संगठन को बिजली दरों में रियायत।
-युवाओं के बीच स्टार्टअप्स का सपना साकार करने के लिए प्रावधान।
-महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक आजादी को तरजीह।
-खिलाडिय़ों को अतिरिक्त सरकारी मदद।
-स्टेट टैक्स में सुधार के लिए भी निर्णय।
-रियल एस्टेट सेक्टर को स्टांप ड्यूटी से राहत।
-मंडी कारोबारियों को मंडी शुल्क में राहत।