
सबरीमाला में प्रवेश को लेकर धर्मयुद्ध, इस मंदिर में 23 सालों से ससुर के संकल्प को निभा रहीं महिला पुजारी
सविता व्यास
जयपुर। देशभर में जहां सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर धर्मयुद्रध छिड़ा हुआ है। वहीं छोटी काशी में बगलामुखी माता का मंदिर परंपराओं और झूठे आडंबर से परे हैं। मालवीय नगर के सेक्टर तीन स्थित बगलामुखी माता का ये मंदिर शायद जयपुर का एक अकेला ऐसा मंदिर होगा, जहां माता की सेवा—पूजा और आरती का कार्य किसी महिला द्वारा किया जाता है। लोगों की आस्था और विश्वास का ही नतीजा है कि 23 सालों में बगलामुखी मंदिर की गिनती माता के प्रमुख मंदिरों में की जाती है। नवरात्र में मंदिर में दर्शनों के लिए दूर—दूर से भक्त आते हैं।
मंदिर की पुजारिन शशि मिश्रा ने बताया कि बगलामुखी मंदिर की स्थापना उनके ससुरजी प्रोफेसर सीएम मिश्रा ने की थी। उनके गुरुजी दतिया महाराज ने उनसे गुरु दक्षिणा में मंदिर बनवाने का संकल्प लिया था। इसके बाद ससुरजी ने 1995 में मंदिर की स्थापना की। मंदिर में गुरु महाराज की मूर्ति भी स्थापित है। मंदिर में 23 साल से माता की सेवा—पूजा का काम संभालती हूं। ससुरजी ने ही इसकी दीक्षा दी थी। उन्हीें की कृपा से माता की सेवा—पूजा करने का मौका मिला है। मंदिर में संस्कृत में ही माता की आरती की जाती है। हल्दी की माला से मंत्रों का जाप किया जाता है।
राजस्थान में पहला मंदिर
मिश्रा ने बताया कि राजस्थान में बगलामुखी का पहला मंदिर है। मध्यप्रदेश में बगलामुखी माता जी का मंदिर दतिया में है, जहां अभी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी भी पूजा करने गए थे। दतिया में आखातीज के दूसरे दिन जयंती मनाई जाती है। वहां मेला भी भरता है। इसीलिए मंदिर में भी उसी दिन जयंती मनाई जाती है। हल्दी की माला से मंतत्रों का जाप किया जाता है। नवरात्र में अखंड ज्योति प्रज्जवलित करते हैंं। अष्टमी को हवन पूजन कर कन्याओं को खाना खिलाया जाता है।
तंत्र साधना की देवी है माता
मां दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक देवी बगलामुखी को तंत्र साधना की देवी माना जाता है। मां बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी हैं। इन्हें पीला रंग प्रिय है, इसीलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे अधिक होता है। बगलामुखी देवी रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजत होती हैं। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है और भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है।
Published on:
17 Oct 2018 12:49 pm
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