
Soap and detergent industry: राजस्थान की सोप व डिटर्जेंट इंडस्ट्री वेंटीलेटर पर
नॉन एडिबल ऑयल का बाजार काफी तेज बना हुआ है, जिसके चलते राजस्थान में सोप व डिटर्जेंट इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। नॉन एडिबल ऑयल समेत इंडस्ट्री से जुड़े सभी रॉ-मेटेरियल के दाम एकतरफा तेजी देखने को मिल रही है, जिसके कारण राजस्थान में सोप व डिटर्जेंट की सैंकड़ों युनिट्स में या तो उत्पादन बाधित हो गया है या फिर कई पूर्ण रूप से बंद हो गई है। राजस्थान साबुन निर्माता संघ के कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश सोमानी का कहना है कि क्रूड पॉम ऑयल (सीपीओ) का इंटरनेशनल मार्केट तेज होने, ब्राजील में सोया की क्रॉप कम होने के साथ मलेशिया व इंडोनेशिया में पाम ऑयल का स्टॉक घटने के कारण नॉन एडिबल ऑयल के दामों में जोरदार वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर सोप एंड डिटर्जेंट इंडस्ट्रीज पर दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल की दाम दिनोंदिन बढ़ने की वजह से महंगाई तेजी से अपने पैर पसार रही है। साबुन इंडस्ट्री में नॉन एडिबल ऑयल का काफी उपयोग होता है। पहले के मुकाबले नॉन एडिबल ऑयल की कीमतें लगभग दोगुनी से अधिक हो गई हैं। इसी तरह अन्य उत्पादों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। डिमांड और सप्लाई का गणित भी फेल हुआ है। इससे इंडस्ट्रीज का प्रोडक्शन भी बाधित हुआ है।
जीएसटी कानून से पूर्व राजस्थान में करीब 2000 इंडस्ट्री कार्यरत थी। जीएसटी टैक्स लागू होने के बाद 500 इकाइयां बंद हो गई थी। राजस्थान में फिलहाल 700 से 800 युनिट्स चल रही है। उद्यमियों का मार्केट में पैसा रूका पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए है, जिस कारण सरकार को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान में साबुन, डिटर्जेंट व डिश वॉश आदि प्रोडक्ट्स पर 18 फीसदी जीएसटी वसूला जा रहा है, जिसमें कटौती कर साबुन इंडस्ट्री से जुड़े प्रोडक्ट को 5 फीसदी जीएसटी के स्लैब में शामिल करने की आवश्यकता है।
Updated on:
31 Mar 2022 04:33 pm
Published on:
31 Mar 2022 10:52 am
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