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…तो क्या लुप्त हो जाएगा राजस्थान का राज्य पक्षी?

राजस्थान का राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गोडावण मानवीय हस्तक्षेप बढऩे के कारण लुप्त होने के कगार पर है।

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avanish kr upadhyay

May 04, 2015

राजस्थान का राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गोडावण मानवीय हस्तक्षेप बढऩे के कारण लुप्त होने के कगार पर है। राष्ट्रीय मरु उद्यान में पिछले चार दशक से गोडावण की संख्या में निरन्तर कमी के चलते अब इनकी संख्या घटकर 40 तक जा पहुंची है। देश भर में गोडावण की प्रमुख आश्रय स्थली माने जाने वाला राष्ट्रीय मरु उद्यान बाड़मेर जैसलमेर के कुल 3162 वर्ग किमी क्षेत्र में बढ़ता जैविक दबाव और मानवीय हलचल से गोडावण के भोजन का प्रमुख आधार भी निरंतर समाप्त हो रहा है।

शर्मीला पक्षी
यह जमीन से 20 से 25 फीट ऊंचाई तक अधिकतम एक किमी तक उड़ान भरने की क्षमता रखने वाला शर्मीला पक्षी है। लंबी पतली सफेद गर्दन सिर पर काला क्राउन तथा औसतन 10 किलो वजनी नर गोडावण 120 व मादा 90 सेमी ऊंची होती हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में शामिल लुप्तप्राय दुर्लभ पक्षी के पैरों में केवल तीन अंगुलियां होने से यह पेड़ों की टहनी पर नहीं बैठ सकता है। भारतीय पक्षियों में सबसे ऊंचा पक्षी गोडावण जमीन पर अंडे देने के कारण सरिसृप का भोजन बनने और पालतू मवेशियों के पैरों तले अंडों के कुचले जाने से भी इनकी संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पाती।

चार से दो अंकों तक पहुंची संख्या
करीब चार दशक पूर्व थार रेगिस्तान में सम, सुदाश्री, फुलिया, म्याजलार, खुड़ी, सत्तो आदि क्षेत्र में गोडावण की संख्या करीब 1260 थी जो घटकर मात्र 40 रह गई है। वर्ष 1979 में अरब देश के शाह बदर की ओर से जैसलमेर में गोडावण शिकार की घटना के बाद गोडावण पक्षी विश्व भर में चर्चा का विषय बना था। पिछले साल राज्य सरकार ने गोडावण संरक्षण के लिए 12 करोड़ 90 लाख की पांच वर्षीय परियोजना आरंभ की है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी मुंबई के निदेशक डॉ. ए रहमानी व बीकानेर जोधपुर जंतुआलय के अधीक्षक रहे वाईडी सिंह ने गोडावण संरक्षण के लिए लंबे अर्से तक प्रयास किया।

वन विभाग की गणना में गोडावण की स्थिति
2004-110, 2005-96, 2006-गणना नहीं, 2007-73, 2008-70, 2009-54, 2010-45, 2011-52, 2012-60, 2013-44, 2014-40


संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद
विभाग की गणना रिपोर्ट में जो गोडावण नजर आए केवल उन्हें ही दर्शाया गया है। दशकों बाद क्षेत्र में गोडावण के चूजे एवं परिपक्व गोडावण परिवार के अलग-अलग कुनबे नजर आने से इनकी संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों की टीम ने इनके संरक्षण व स्टेटस के लिए डेजर्ट नेशनल पार्क का सर्वे किया है। गोडावण की संख्या बढ़ाने के लिए डीएनपी में नए क्लोजर का निर्माण, सुरक्षित प्राकृतवास, डीएनपी में बसे ग्रामीणों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
-गोबिन्द सागर भारद्वाज, मुख्य वन संरक्षक जोधपुर संभाग (वन्यजीव )