
जयपुर. 19 मई 2017 को रिलीज हुई फिल्म "हिंदी मीडियम" तो आप सबने देखी ही होगी, इस फिल्म ने हमें बताया कि समाज में इंग्लिश बोलने वालों और इंग्लिश मीडियम में पढ़ने वालों को हिंदी मीडियम की तुलना में ज्यादा तव्वोजो दिया जाता है, जो गलत है।
राजस्थान के विकास मीणा हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई कर आज आईएएस बन चुके हैं। एक वक्त था जब वे राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचे थे और हिंदी मीडियम को अपनी ताकत बना कर पहले प्रयास में आईपीएस अफसर बनने में सफल रहे। लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का था ऐसे में उन्होंने एक बार और कोशिश की फिर 2017 में उनका चयन आईएएस के रूप में हो ही गया.. लेकिन यह सफर आसान नहीं था।
विकास जब दिल्ली यूपीएससी की तैयारी के लिए आए थे तो वे हिंदी मीडियम को लेकर काफी डरे हुए थे। वे कहते हैं कि वह एक ऐसा दौर था जब हिंदी मीडियम वाले बहुत कम बच्चे यूपीएससी में सफल हो पाते थे। हालांकि उन्होंने अपने डर को दूर करते हुए हिंदी मीडियम के जरिए ही इस परीक्षा को पास करने की ठान ली थी। एक सटीक रणनीति अपनाकर उन्होंने हिंदी मीडियम के दम पर सफलता हासिल की है। विकास का कहना है कि जब आप अपने सपनों को सचमुच पूरा करना चाहते हैं तो यह बिल्कुल ही भूल जाइए कि आप किस बैकग्राउंड से आते हैं।
विकास का जन्म राजस्थान के गांव में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी यहीं से हुई। इसके बाद उनके परिवार वालों ने उन्हें यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया। विकास और उनके भाई दिल्ली आकर यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। विकास हिंदी मीडियम से पढ़े हुए थे और इसी को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। उन्होंने एक सटीक रणनीति बनाकर यूपीएससी की परीक्षा दी और पहली बार में उन्हें सफलता मिल गई। रैंक के अनुसार उन्हें आईपीएस सेवा के लिए चुना गया। हालांकि उन्हें आईएएस अफसर बनना था ऐसे में दूसरी बार कोशिश की और इसमें उन्हें कामयाबी मिल गई।
Updated on:
09 May 2024 02:30 pm
Published on:
09 May 2024 02:27 pm
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