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Rajendra Gudha : पार्टी बदली- आक्रामकता बरकरार, जानें अब क्यों बोले ‘वो दिन संस्कारित बहू के कैबरे डांस जैसा’

Rajasthan Assembly Election 2023 : कांग्रेस छोड़ शिवसेना के हुए विधायक राजेंद्र गुढ़ा, महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने करवाई पार्टी ज्वाइन, 5वीं बार दल-बदल, दो-दो बार रहे कांग्रेस-बसपा में, 'लाल डायरी' के बाद से निशाने पर बने हुए हैं मुख्यमंत्री
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Rajendra Gudha Joins Shiv Sena ahead of Rajasthan Assembly Election

जयपुर।

कांग्रेस छोड़ शिवसेना में शामिल हुए राजेंद्र गुढ़ा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। गुढ़ा ने सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए पूर्व के एक राजनीतिक घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि वो वाक्या एक संस्कारित बहू के कैबरे डांस था। गुढ़ा का ये ताज़ा विवादित बयान उदयपुरवाटी के गुढ़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आया।

इससे पहले विधायक गुढ़ा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना पार्टी ज्वाइन की। ये पांचवीं बार है जब गुढ़ा ने दल-बदल कर एक अन्य पार्टी का दामन थामा है। अपने राजनीतिक करियर में गुढ़ा दो बार बसपा से, तो दो बार कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर चुके हैं। हाल ही में अपनी ही सरकार के खिलाफ 'लाल डायरी' विवाद छेड़कर सुर्ख़ियों में आये गुढ़ा को राज्य मंत्री पद से बर्खास्त किया गया था।

'संस्कारित बहू के कैबरे डांस जैसा'

विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में गहलोत सरकार पर राजनीतिक संकट के वक्त को याद किया। उन्होंने कहा कि जब मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक यहां पहुंचे थे तब उन्हें किस दुर्दशा करके निकाला गया था ये सभी जानते हैं। इसके लिए बाकायदा मुख्यमंत्री ने सोनिया गांधी से माफ़ी भी मांगी थी। उस दिन ठीक वैसा ही हुआ था जैसे कि एक संस्कारित बहू कैबरे डांस कर रही हो।

'सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहे सीएम'

गुढ़ा ने एक अन्य सवाल में कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर ईडी-सीबीआई जैसे एजेंसियों का नाम लेकर केंद्र सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगाते हैं। लेकिन ठीक वैसा ही अब वे यहां भी कर रहे हैं। गुढ़ा ने कहा कि जब तक मैं उनके साथ रहा तब तक सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही मैं अलग हुआ मुझपर रोज़ मुकदमे लगा रहे हैं। ये सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग नहीं है तो क्या है?

'बूढ़े हो गए हैं गहलोत'

गुढ़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थितियां सही नहीं हैं। हकीकत चुनाव के नतीजों में सामने आ जायेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में जब सीएम गहलोत 50-55 साल की उम्र के जवान थे, तब वे सरकार नहीं बना पाए। वर्ष 2013 में जब उनकी उम्र 62-63 साल की हुई तब भी रिपीट नहीं हो सके। अब तो वो 73 साल के बूढ़े हो गए हैं।

शिंदे ने ज्वाइन करवाई शिवसेना

गहलोत सरकार से बर्खास्त मंत्री व झुंझुनूं के उदयपुरवाटी से विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने पांचवीं बार अपना राजनीतिक पाला बदल लिया है। हाल ही में गहलोत सरकार के खिलाफ 'लाल डायरी' विवाद के बाद चर्चा में आए गुढ़ा अब की बार शिवसेना पार्टी में शामिल हुए हैं। महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने बाकायदा उदयपुरवाटी के गुढ़ा गांव पहुंचकर राजेंद्र गुढ़ा को शिवसेना पार्टी (एकनाथ शिंदे गुट) को ज्वाइन करवाया। इस आधिकारिक जोइनिंग के बाद से विधायक गुढ़ा को लेकर पिछले कुछ दिनों से नई पार्टी में शामिल होने की तमाम अटकलों और चर्चाओं पर विराम लग गया है।

सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना है - शिंदे

गुढ़ा को शिवसेना में शामिल करने के दौरान महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि राजस्थान में शिवसेना आने वाले दिनों में बेहतर तरीके से काम करेगी। उन्होंने कहा कि हम राजनीति कम और काम ज्यादा करते हैं। इसी तरह से हम यहां भी काम करेंगे।

'कुछ लोगों का निजी स्वार्थ है'

महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारी महाराष्ट्र सरकार विकास के कई कार्य कर रही है, यहां भी विकास के कई द्वार हैं लेकिन कुछ लोगों का निजी स्वार्थ है। राज्य की जनता का विकास छोड़कर जब लोग खुद का विकास करने लगते हैं, तो राज्य का विकास नहीं होता है, जैसा की राजस्थान में हो रहा है।

'राजेन्द्र गुढ़ा से डर गए आपके सीएम'

सीएम गहलोत पर निशाना साधते हुए महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि आपका सीएम, राजेन्द्र गुढ़ा से डर गया। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने क्षेत्रवासियों को 5 नई एंबुलेंस का तोहफा दिया।

राजेंद्र गुढ़ा ने पांचवीं बार बदल दल

गौरतलब है कि राजेंद्र गुढ़ा हमेशा से मौकापरस्त रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले वर्ष 2008 में बसपा के टिकट पर उदयपुरवाटी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत की पताका फहराया। पर 'हाथी' की सवारी छोड़कर 'हाथ' का साथ कर लिया। इसके इनाम के एवज में वे मंत्री बनाए गए। फिर वर्ष 2013 में कांग्रेस टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे पर हार गए। फिर वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मायावती का प्रेम जागा और वे कांग्रेस छोड़ बसपा में शामिल हो गए। जीतकर दूसरी बार विधायक बने। सबको फिर हैरान कर करते हुए उन्होंने एक बार फिर बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा और राज्य मंत्री बन गए।