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राम भले ही नायक, लेकिन रावण के बिना रामलीला अधूरी

रामलीला के प्रमुख दो किरदार है राम और रावण। लोग राम को जहां नायक के रूप में देखते हैं, वहीं रावण को खलनायक समझा जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। राम भले ही नायक है, लेकिन रावण के बिना रामलीला अधूरी है।

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राम भले ही नायक, लेकिन रावण के बिना रामलीला अधूरी

राम भले ही नायक, लेकिन रावण के बिना रामलीला अधूरी

देवेन्द्र सिंह / जयपुर. रामलीला के प्रमुख दो किरदार है राम और रावण। लोग राम को जहां नायक के रूप में देखते हैं, वहीं रावण को खलनायक समझा जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। राम भले ही नायक है, लेकिन रावण के बिना रामलीला अधूरी है। आइए जानते हैं राम और रावण का किरदार निभाने वाले पात्र इस बारे में क्या सोचते हैं।

आज के युग में रावण एक ब्रांड
बैकुंठनाथ चतुर्वेदी वैसे तो पंडिताई करते हैं, लेकिन तीस साल से रावण का किरदार निभा रहे हैं। चतुर्वेदी का कहना है कि रावण पूर्ण किरदार है, रावण भक्ति, तपस्या, शक्ति, भक्ति, वीरता, वैभव सब में परिपूर्ण था। ऐसे में उसे खलनायक मानना गलत होगा। मैं रावण की भूमिका निभाते हुए नकारात्मक किरदार को सकारात्मक बनाने का प्रयास करता हूं। अगर देखा जाए तो रामलीला में लोग राम को नहीं, रावण को देखने के लिए आते हैं। आज के युग में रावण एक ब्रांड बन गया है।

मर्यादा में रहना सिखाते हैं राम
जवाहर नगर शिव मंदिर पार्क में चल रही रामलीला में राम की भूमिका निभा रहे गणेश चतुर्वेदी का कहना है वे पिछले 10 साल से राम का किरदार निभा रहे हैं। भगवान राम एक मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उनकी भूमिका निभाना बहुत कठिन है। उनका किरदार पूरी तरह से तो नहीं, उसे अच्छी तरह निभाने की कोशिश करता हूं। जिस दिन रामलीला शुरू होती है और हाथ में कलाया बंधता है लोग नाम नहीं, बल्कि रामजी के नाम से ही पुकारते हैं। सब लोग आदर सम्मान देते हैं। राम लोगों को हमेशा मर्यादा में रहने का संदेश देते हैं।

संस्कृति से जोड़ती है राम लीला
श्रीराम मंदिर प्रांगण में हो रही रामलीला में पिछले 12 साल से राम का किरदार निभा रहे आशीष गौतम एक कैमिकल फैक्ट्री में सीनियर सैल्स मैनेजर हैं। गौतम का मानना है कि राम एक आदर्श पुरुष थे और उन्होंने मर्यादाओं का पालन किया। आधुनिकता की दौड़ में भले ही हम आगे हैं, लेकिन सभ्यता और संस्कृति विहीन नहीं हुए है। राम का किरदार निभाते-निभाते जीवन अध्यात्म में रम गया है। हमेशा यही प्रयास रहता है कि जीवन में कोई गलत काम नहीं हो।

राक्षस कुल का करवाया कल्याण
6 साल से रावण का किरदार निभा रहे शिवकांत गौतम का कहना है कि रावण एक महान योद्धा होने के साथ प्रकांड विद्वान भी था। ऐसे में उसे खलनायक मानना सही नहीं है। स्वयं भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण के पास शिक्षा लेने भेजा था। रावण में कई गुण विद्यमान थे, जिनको हम ग्रहण कर अपना जीवन सुधार सकते हैं। रावण चाहता तो अपना और अपने परिवार का कल्याण करवा सकता था, लेकिन उसने अपने साथ पूरे राक्षस कुल का कल्याण करवाया। मैं रावण में हमेशा सकारात्मक पहलू को देखता हूं।