
सात साल का शामाज और 91 बरस की शरीफन रोजा रखकर मांग रहे कोरोना के खात्मे की दुआ
जयपुर. भीषण गर्मी में लगने वाली भूख-प्यास भी रोजेदारों के जज्बे को कमजोर नहीं कर पा रही है। शहर में सात साल के छोटे बच्चे भी रोजे रखकर खुदा को राजी करने में लगे हुए हैं। खास बात ये है कि ये बच्चे बाकायदा बड़ों की तरह सहरी में उठते हैं, अलग-अलग नमाजे अदा करने के साथ साथ दूसरी इबादतों पर भी खास ध्यान देते हैं। तो वहीं दूसरी ओर 90 साल के बुजुर्ग बुजुर्ग भी कमजोर सेहत के बावजूद रोजे रखने में पीछे नहीं हैं।
हालांकि इस्लाम के मुताबिक छोटे बच्चों और उम्रदराज कमजोर बुजुर्गों को रोजों में रियायत भी दी गई हैं। लेकिन इनके हौसले के आगे बढ़ती उम्र की कमजोरी, झुलसा देने वाली गर्मी समेत सभी परेशानियां दम तोड़ती नजर आ रही हैं। कोरोना से निजात के लिए भी रोजेदार खास तौर से दुआएं कर रहे हैं।
रोज़ा अल्लाह के नजदीक होने का जरिया है, इससे हमदर्दी का जज़्बा पैदा होता है। पिछले 65 साल से रोजे रख रहा हूं। तरावीह भी हमेशा पढ़ता आया हूं। मैंने फिजूल में रोज़ा कभी नही छोड़ा, यही हिदायत घर वालों को भी देता हूं।
मास्टर सिराजुद्दीन, उम्र 80 साल
सूरजपोल, जयपुर
रमजान मुझे बहुत पसंद हैं, एक दिन छोड़कर दूसरे दिन रोजा रखती हूं। रात को फैमली के साथ तरावीह की नमाज पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। मैं कुरआन पाक भी पढ़ती हूं, और घर वालों से इसका मतलब भी समझती हूं।
खदीजा, उम्र 9 साल
रामगंज बाजार, जयपुर
अम्मी अब्बू के साथ मुझे रोजे रखना बहुत अच्छा लग रहा है। अम्मी मेरी सेहरी और इफ्तार का ध्यान रखती हैं। मैं हर नमाज में अल्लाह से दुआ कर रहा हूं कि इस दुनिया से कोरोना वायरस जल्द से जल्द खत्म हो जाए।
शामाज अली,उम्र 7 साल
सुभाष चौक, जयपुर
10-12 वर्ष की उम्र से ही रोजे रख रही हूं। इससे मुझे रूहानी सुकून मिलता है। दौरान कोरोना के खात्मे की दुआ करती हूं। लोगों से कहना चाहूंगी कि ये रमजान अनमोल हैं। इन्हें जाया न करें। जितना हो सके खुदा की इबादत करें।
शरीफन बेगम, उम्र 91
खो नागोरियान, जयपुर
Published on:
09 May 2021 08:19 pm
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