
Ramdev Mela Nawalgarh: लगभग 500 वर्ष पूर्व स्थापित नवलगढ़ के रामदेवजी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धोक लगाने आते हैं। यहां भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी को लक्खी मेला शुरू होता है। इसमें 5 से 7 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के शुरू होने की एक अनूठी परम्परा है।
एक दिन पहले नवमी को राज परिवार के रूप निवास पैलेस से एक घोड़ा रामदेवजी मंदिर में आकर धोक लगाता है। घोड़े के साथ सफेद ध्वज लेकर सेवक चलते हैं। ध्वज को मंदिर के गुम्बद पर लगाया जाता है। घोड़ा आने के बाद मंदिर में बाबा की जोत के साथ मेला शुरू हो जाता है। सैंकड़ों वर्ष से यह परंपरा चली आ रही है।
इस साल 24 को आएगा घोड़ा
मेले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्थाएं शुरू हो चुकी हैं। मेले में होने वाले फुटबॉल मैच का रोमांच भी शुरू हो चुका है। यहां तक कि झूले आदि भी लग चुके हैं और श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। इस बार 24 सितम्बर को घोड़ा धोक लगाएगा और जोत ली जाएगी। वहीं 25 सितम्बर से लक्खी मेला शुरू होगा जो करीब एक सप्ताह तक चलेगा।
यूं शुरू हुई परम्परा
नवलगढ़ के रामदेवजी मंदिर में रामदेवजी महाराज के घोड़े लीलण की समाधि है। रामदेवजी मंदिर के पुजारियों ने बताया कि तत्कालीन जागीरदार ठाकुर नवलसिंह शेखावत की पत्नी उदावती देवी बाबा रामदेवजी की परम भक्त थी। सन् 1774 में दिल्ली सल्तनत के आदेश पर मिर्जा नजफ कुली ने जागीरदार नवलसिंह शेखावत सहित पंचपाना के जागीरदारों को उदयपुरवाटी बुलाकर धोखे से नजरबंद कर दिया था। तब नवलसिंह की पत्नी उदावती कंवर रामदेवजी से पति के सुरक्षित लौटने की प्रार्थना की।
248 साल से भरता आ रहा बाबा रामदेवजी का मेला
मान्यता है कि नजरबंद हुए नवलसिंह के पास रामदेवजी का घोड़ा पहुंचा। उस पर सवार होकर नवलसिंह नवलगढ़ आए और दक्षिण दिशा में स्थित जोहड़ में आकर घोड़े से उतरे। उस समय उन्हें बाबा रामदेवजी के दर्शन हुए। इसके बाद सन् 1775 में उदावती देवी ने मंदिर का निर्माण शुरू करवाया। तब से ही करीब 248 सालों से बाबा रामदेवजी का मेला भरता आ रहा है। माघ मास में बाबा रामदेवजी का छोटा मेला भरता है। भाद्रपद में बड़ा मेला भरता है।
Published on:
23 Sept 2023 06:34 pm
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