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23 साल बाद मकर संक्रांति पर्व पर खास षटतिला एकादशी का महासंयोग, सूर्यदेव का भी होगा मकर राशि में प्रवेश

नववर्ष- 2026 का पहला बड़े पर्व मकर संक्रांति लंबे समय बाद खास रहेगा। संक्रांति का बाघ पर होगा प्रवेश, दान पुण्य के लिए शहरवासियों के लिए सुबह से रहेगा शुभ समय। पर्व पर दान की विशेष महत्ता।

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जयपुर

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Harshit Jain

Jan 07, 2026

जयपुर. नववर्ष—2026 का पहला बड़े पर्व मकर संक्रांति लंबे समय बाद खास रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक लगभग 23 साल बाद दान पुण्य और पतंगबाजी के लिए खास मकर संक्रांति के पर्व पर षटतिला एकादशी का महासंयोग भी बनेगा। इस मौके पर दान पुण्य के लिए दिनभर शुभ दिन रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक इसी दिन ग्रहों के राजा सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि पुष्कर जैसे तीन योग रहेंगे। संक्रांति का प्रवेश वाहन बाघ और उपवाहन अश्व रहेगा। इससे आगामी समय प्रजा के लिए बेहद फलदायी रहेगा। इसी दिन संक्रांति का पुण्य काल भी मान्य रहेगा। व्यापारिक जगत में कई नवाचार होंगे। देश की साख भी देश दुनिया में मजबूत होगी। महंगाई बढ़ने के आसार भी रहेंगे। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3.07 बजे होगा। लेकिन पुण्यकाल सुबह 8.43 बजे से शुरू हो जाएगा। 23 साल पहले पुत्रदा एकादशी का संयोग बना था।

शर्मा के मुताबिक प्रजा में आवश्यक वस्तुओं की सुलभता बढ़ेगी। संक्रांति की जाति भूत और शरीर पर कुमकुम का लेप लगाकर पीले रंग के वस्त्र चमेली के पुष्प की माला धारण कर हाथ में शस्त्र लेकर चांदी के बर्तन में खीर का भोजन करती हुई बैठी हुई अवस्था में दिन के तीसरे भाग में प्रवेश कर रही है। हालांकि वर्ष के मध्य में मौसम और प्राकृतिक संतुलन को लेकर सावधानी जरूरी रहेगी।

ऐसे समझें

ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ के मुताबिक शास्त्रानुसार 'माघे मासि दिने पुण्ये, मकरस्थे दिवाकरे' अर्थात मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अक्षय फल देता है। यह पर्व कृषि और ऋतु परिवर्तन से भी जुड़ा हुआ है। देशभर में इस दिन को विभिन्न नामों से मनाया जाता है, उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू और पंजाब में लोहड़ी (पूर्व संध्या)। यह पर्व यह संदेश देती है कि जैसे सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना चाहिए। यह दिन नव आरंभ, सकारात्मक संकल्प और साधना के लिए श्रेष्ठ है।

मकर संक्रांति पर क्या करें दान

तिल और गुड़ - तिल का दान करने से सूर्य और शनि दोष शांत होते हैं।

खिचड़ी - चावल और मूंग दाल से बनी खिचड़ी का दान ग्रह दोषों को कम करता है।

गर्म कपड़े - जरूरतमंदों को कंबल या गर्म वस्त्र देने से पुण्य फल मिलता है।

घी - गाय के शुद्ध घी का दान करियर और आर्थिक उन्नति में सहायक माना गया है।

रेवड़ी और मूंगफली - इनका दान रिश्तों में मधुरता बढ़ाता है।

(कृष्णमूर्ति ज्योतिषाचार्य पं.मोहनलाल शर्मा के मुताबिक )


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