
राजस्थान में रसोई गैस की किल्लत अब एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने गुरुवार शाम प्रेस वार्ता कर दावा किया कि राजस्थान में गैस का 'पर्याप्त स्टॉक' है और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन धरातल पर हालात इसके उलट हैं। 'पत्रिका' के एक विशेष सर्वे और ग्राउंड रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जयपुर से लेकर जोधपुर तक उपभोक्ता 'स्टॉक खत्म है' और 'गाड़ी नहीं आई' जैसे बहाने सुनकर खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पैनिक बुकिंग रोकने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।
सरकारी दावों के उलट, जमीनी हकीकत डराने वाली है। सर्वे के अनुसार:
संकट के इस दौर में कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। सर्वे में 15% लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें अतिरिक्त पैसे (प्रीमियम) देने पर तुरंत सिलेंडर देने का ऑफर मिला। इसमें 60% मामलों में एजेंसी कर्मचारी और 40% में डिलीवरी बॉय शामिल हैं। सवाई माधोपुर और राजधानी जयपुर से ऐसी सर्वाधिक शिकायतें मिली हैं।
गैस का संकट केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। सर्वे में जयपुर, जोधपुर, अलवर और टोंक में सबसे ज्यादा परेशानी दर्ज की गई है। इसके अलावा श्रीगंगानगर, पाली, राजसमंद और बूंदी में भी रिफिलिंग को लेकर लंबी वेटिंग चल रही है। लोग सुबह से एजेंसियों के बाहर खाली सिलेंडर की कतारें लगाकर खड़े हैं, जबकि सरकार कह रही है कि 'स्थिति सामान्य है'।
मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि अगर कहीं भी कालाबाजारी या अवैध भंडारण हो रहा है, तो उपभोक्ता इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं:
Updated on:
13 Mar 2026 10:26 am
Published on:
13 Mar 2026 10:26 am
