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RCA को लगा हाईकोर्ट से झटका, नांदू गुट को मिली बड़ी राहत…जानें पूरा मामला

राजस्थान क्रिकेट संघ को एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, आरसीए ने 4 जुलाई को साधारण सभा की बैठक में श्रीगंगानगर, नागौर और अलवर जिला क्रिकेट संघ की संबद्धता खत्म कर दी थी।

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RCA को लगा हाईकोर्ट से झटका, नांदू गुट को मिली बड़ी राहत

RCA को लगा हाईकोर्ट से झटका, नांदू गुट को मिली बड़ी राहत

जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ को एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, आरसीए ने 4 जुलाई को साधारण सभा की बैठक में श्रीगंगानगर, नागौर और अलवर जिला क्रिकेट संघ की संबद्धता खत्म कर दी थी। इस मामले को पदाधिकारियों ने अदालत में चुनौती दी। जिस पर जस्टिस महेन्द्र गोयल की ओर से आरसीए के आदेश को स्टे करते हुए तीनों संघों को बहाल कर दिया है। बता दें कि जिला क्रिकेट संघ श्रीगंगागगर के सचिव विनोद सहारण व नागौर के सचिव आरएस नांदू है।

दरअसल, यह पूरा प्रकरण वर्ष 2019 से जुड़ा है। 7 जनवरी, 2019 को आरसीए ने तीनों जिलों की मान्यता इसलिए रद्द कर दी कि वे ललित मोदी से जुड़े हुए हैं। इसके बाद तीनों संघों ने लोकपाल के पास सुनवाई के लिए अर्जी दायर की। इस पर 2 अक्टूबर, 2019 को लोकपाल ने मान्यता रद्द करने के आदेश को स्टे कर दिया। इसके तुरंत बाद साधारण सभा ने लोकपाल बदल दिया। नए लोकपाल शिवकीर्ति सिंह ने सुनवाई शुरू कर दी और 5 जुलाई, 2021 को फैसला दिया कि तीनों जिला संघ ने आरसीए और बीसीसीआई पर जो भी केस कर रखे हैं, उन्हें वापस ले लें। इसके साथ ही 7 जनवरी 2019 के पत्र की कंप्लायंस पूरी कर सूचना आरसीए को दें। ऐसे में यदि आरसीए संतुष्ट हो तो मान्यता दे सकते है। लोकपाल के आदेश पर तीनों जिला संघों ने सभी कोर्ट केस वापस ले लिए और 27 जुलाई, 2021 को सभी कंप्लायंस पूरी करके आरसीए को भेज दी। इस पर लोकपाल शिवकीर्ति सिंह ने आदेश दिया कि तीनों ने कंप्लायंस पूरी कर ली है और इन्हें पूर्ण जिला संघ मानते हुए आगे की कार्रवाई की जाए।

ये आदेश देने के बाद 21 सितंबर, 2021 को लोकपाल हटा दिया गया, जबकि उन्हें 25 सितंबर 2021 को मामले पर अंतिम निर्णय करना था। तीनों संघों के पदाधिकारियों का कहना था कि नए लोकपाल ने अब तक ना तो उन्हें नोटिस दिया और ना ही कोई पत्राचार हुआ। ऐसे में 7 जनवरी, 2019 के आदेश स्टे हैं और 4 जुलाई को हुई आरसीए की कार्रवाई को पूरी तरह से अवैधानिक ठहराया।

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