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विवादों का​ रीट्वीट, गरमाएगा राजस्थान का सियासी पारा

कांग्रेस का पंजाब में चल रहा सियासी घमासान अभी थम ही नहीं पाया कि राजस्थान में भी विवादों का री—ट्वीट आने के बाद वापस राजनीति गरमा गई है।

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जयपुर

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Rahul Singh

Jul 20, 2021

ajay makan

ajay makan

जयपुर। कांग्रेस का पंजाब में चल रहा सियासी घमासान अभी थम ही नहीं पाया कि राजस्थान में भी विवादों का री—ट्वीट (Re- Tweet )आने के बाद वापस राजनीति गरमा गई है। गहलोत और पायलट गुट में एक बार फिर से तलवारें खिंच गई है। इसके पीछे एक बड़ी वजह पार्टी के राजस्थान प्रभारी अजय माकन (Ajay Makan) का एक रि— ट्वीट है और इस रि ट्वीट से अजय माकन ने गहलोत (Ashok Gehlot )पर निशाना साधा है। इसके आने के बाद गहलोत समर्थकों में नाराजगी पैदा हो गई है।

ये है विवाद का री—ट्वीट

कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने एक पत्रकार के ट्वीट को री—ट्वीट किया है। इसमें पत्रकार ने पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करने करने को लेकर खुद की राय देते हुए लिखा हैं कि नवजोत सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करके पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सही काम किया है क्योंकि शीर्ष नेतृत्व को कांग्रेस के क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच अपनी ताकत बताना भी जरूरी थी।

अमरिंदर का बहाना, गहलोत पर निशाना
ट्वीट में कांग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय क्षत्रपों पर निशाना साधते हुए लिखा गया है, किसी भी राज्य में कोई क्षत्रप अपने दम पर नहीं जीतता है। गांधी नेहरू परिवार के नाम पर ही गरीब, कमजोर वर्ग, आम आदमी का वोट मिलता है। मगर चाहे वह अमरिन्द्र सिंह हों या गहलोत या पहले शीला या कोई और! मुख्यमंत्री बनते ही यह समझ लेते हैं कि उनकी वजह से ही पार्टी जीती। 20 साल से ज्यादा अध्यक्ष रहीं सोनिया ने कभी अपना महत्व नहीं जताया। नतीजा यह हुआ कि वे वोट लाती थीं और कांग्रेसी अपना चमत्कार समझकर गैर जवाबदेही से काम करते थे। हार जाते थे तो दोष राहुल पर, जीत का सेहरा खुद के माथे! सिद्धु को बनाकर नेतृत्व ने सही किया। ताकत बताना जरूरी था।

सत्ता में आते ही संघर्ष
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार आते ही दोनों के बीच घमासान चल रहा है। पायलट एक बार अपने समर्थकों के साथ मानेसर में जाकर बगावत भी कर चुके हैं लेकिन बाद में प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप से पायलट की घर वापसी कराई गई। प्रभारी अजय माकन ने राजस्थान में हाल ही में माकन ने दो दिन का दौरा किया था। इसमें उनकी और गहलोत के बीच दो दिन लगातार बैठकें चली। इनमें दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर एक फार्मूला तैयार हुआ लेकिन लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर बात फिर अटक गई है।