
अहमदाबाद. शहर के पास स्थित विश्व प्रसिद्ध नलसरोवर पक्षी अभयारण्य को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए गुजरात वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। यह विश्व प्रसिद्ध ‘रामसर’ साइट है। विभाग ने इस वेटलैंड में और इसके आसपास प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए एक व्यापक प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत अभयारण्य के आसपास के गांवों में फैले प्लास्टिक कचरे को स्थानीय लोग एकत्र करेंगे और वन विभाग उसे निर्धारित कीमत पर खरीदेगा। इससे नलसरोवर में पहुंचने वाले प्लास्टिक कचरे को रोका जा सकेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि इस पहल से नलसरोवर पक्षी अभयारण्य को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने में मदद मिलेगी। प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाएगी।
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Bमध्य एशिया, साइबेरिया के लाखों प्रवासी पक्षियों के लिए अहम आश्रय स्थलBBB
नलसरोवर को वर्ष 2012 में रामसर स्थल का दर्जा मिला था। मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग पर स्थित यह अभयारण्य मध्य एशिया, साइबेरिया और यूरोप से आने वाले लाखों प्रवासी पक्षियों के लिए सर्दियों में महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के सहयोग से चल रही पारिस्थितिकी पुनर्बहाली परियोजना के तहत प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए 2.94 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसे नलसरोवर वन्यजीव प्रभाग, स्थानीय ग्राम पंचायतों, पारिस्थितिकी विकास समितियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से संचालित किया जाएगा।
Bप्लास्टिक कचरा संग्रहण केंद्र स्थापितB
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि जिले की विरमगाम तहसील के कायला गांव में प्लास्टिक कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित किया गया है। इस प्रोजेक्ट में जिले के वेकरिया, कायला, शाहपुर, धारजी और मेणी तथा सुरेन्द्रनगर जिले के नानी कठेची और राणागढ सहित नल सरोवर के आसपास के गांवों को शामिल किया गया है।
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Bप्लास्टिक कचरा एकत्र करने के लिए डिब्बे लगाए गएB
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री प्रवीण माली ने बताया कि वन विभाग की इस पहल से हर वर्ष नल सरोवर में आने वाले प्लास्टिक के कचरे को रोका जा सकेगा और यहां की समृद्ध जैवविविधता को बचाया जा सकेगा। वन विभाग गांवों से प्लास्टिक कचरे का व्यवस्थित एकत्रीकरण करेगा और उसे कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाएगा। इस कचरे को रिसाइकिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों में कचरा एकत्रित करने के लिए डिब्बे रखे गए हैं। इको-डेवलपमेंट कमिटियां ‘स्वच्छता प्रहरियों’ की नियुक्ति करेंगी। ये प्रहरी स्थानीय लोगों को सूखा प्लास्टिक कचरा अलग करने और उसका उचित निपटान करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। दैनिक कचरे के संग्रहण और परिवहन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक विस्तृत वर्क स्टडी भी की गई है।
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B270 पक्षी प्रजातियां मिलींB
नलसरोवर में वर्ष 2025-26 की पक्षी गणना के दौरान 50 सर्वेक्षण क्षेत्रों में कुल 270 पक्षी प्रजातियां और करीब 6.42 लाख पक्षी दर्ज किए गए। वर्ष 2023-24 की तुलना में 26 प्रजातियों और करीब 2.28 लाख पक्षियों की वृद्धि हुई है। इनमें येलो-ब्रेस्टेड बंटिंग, सोशिएबल लैपविंग, इंडियन स्किमर, बेअर्स पोचार्ड, डलमेशियन पेलिकन और सारस क्रेन जैसी दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियां भी दर्ज की गईं। इससे नलसरोवर का प्रवासी और संकटग्रस्त पक्षियों के महत्वपूर्ण आश्रय स्थल के रूप में महत्व और बढ़ गया है।
Bवन विभाग प्लास्टिक कचरा खरीदेगाB
जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रोजेक्ट अंतर्गत वन विभाग अभयारण्य के आसपास के गांवों से एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे को निर्धारित कीमत पर खरीदेगा। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एस.के. श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत कचरा एकत्रित करने के लिए शेड, प्रोसेसिंग यूनिट, कंपाउंड वॉल, सिक्योरिटी केबिन, पानी और बिजली, प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग मशीन, सुरक्षा उपकरण और वेस्ट कलेक्शन बिन जैसी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।
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Updated on:
12 Aug 2026 06:01 am
Published on:
12 Aug 2026 06:01 am
