
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के कैशलेस इलाज के लिए मौजूदा कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम (आरजीएचएस) योजना को नई सरकार बनने से पहले ही आशंका के दायरे में लाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत इलाज के लिए निजी अस्पताल और दवा के लिए निजी दवा दुकानो को चिन्हित किया हुआ है। लेकिन प्रदेश के कई जिलों में कई दवा विक्रेताओं ने भुगतान अटकने के कारण दवा देना या तो बंद कर दिया है। कहीं दी भी जा रही है तो आधी अधूरी या आनाकानी के बाद ही दवा मिल पा रही है। हैरत की बात यह है कि योजना के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
मेडिकल स्टोर संचालकों को आंशका है कि सरकार बदलती है तो भुगतान में और अधिक देरी होगी। इसलिए रोगियों को एक माह की दवा देने की बजाए 5-7 दिन की दवा देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। मेडिकल स्टोर व निजी अस्पतालों के लिए भुगतान नहीं होने से दवा खरीद मुश्किल हो चुकी है। सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सक एक माह की दवा लिखता है तो मेडिकल स्टोर्स संचालक के पास स्टॉक नहीं होने के कारण पांच से सात दिन की ही दवा उपलब्ध करवा रहे हैं।
केस
- हॉर्ट के मरीज कोटा निवासी पेंशनर प्रभुलाल को हर दो माह में चेकअप के बाद दवाइयां लेनी होती है, लेकिन चयनित दुकानों पर दवाइयां नहीं मिलने से उन्हें उपभोक्ता भंडार से दवा लेनी पड़ रही है। वहां भी पूरी नहीं मिल रही।
- पाली के विजय कुमार को कई दवाइयां बाजार से रुपए खर्च कर लानी पड़ रही। निजी दवा विक्रेताओं को लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने से वे दवा देने मे आनाकानी करते हैं।
- झालावाड़ा जिले के शिक्षक नंदराम ने बताया कि आरजीएचएस में दवाई लेने में भी समय लगता है। वहीं कई दवाई तो मिल ही नहीं पाती।
दौसा : सेवानिवृत्त कर्मचारी सुशील शर्मा ने बताया कि कभी साइट नहीं चलने तो कभी भुगतान नहीं मिलने के कारण दवा विक्रेता आनाकानी कर रहे हैं।
अलवर : बकाया भुगतान के कारण दवा विक्रेता दवा देने से इनकार कर रहे हैं। साउथ वेस्ट ब्लॉक निवासी सुरेश शर्मा को बीपी और शुगर की परेशानी है, लेकिन आरजीएचएसमें दवा नहीं मिल पा रही। उन्हें बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है।
नागौर : इक्का दुक्का निजी अस्पतालों में ही योजना के तहत इलाज मिल रहा है। एक दुकान को छोड़कर सभी ने दवा देना बंद कर दिया है। सितम्बर माह से भुगतान नहीं हुआ है।
टोंक : सेवानिवृत्त शिक्षक बरकत अली के अनुसार सरकारी चिकित्सक की लिखी दवाईयां अस्पताल और चिन्हित दुकानों पर नहीं दी जा रही। साइट धीमी चल रही है। कई विक्रेताओं ने भुगतान नहीं मिलने से दवा देना बंद कर दिया। आलाधिकारियों को बताने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
श्रीगंगानगर : मेडिकल स्टोर संचालक इंद्र कुमार को आंशका है कि सरकार बदली तो भुगतान अटक जाएगा। दवा विक्रेताओं और निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं होने से दवाओं की खरीद करनी मुश्किल हो चुकी है।
नहीं मिला जवाब
इस बारे में आरजीएचएस की परियोजना निदेशक शिप्रा विक्रम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
Published on:
30 Nov 2023 01:06 pm

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