
जयपुर. निजी स्कूलों की मनमानी का आलम देखिए, जिन बच्चों को आरटीई के तहत नि:शुल्क शिक्षा के लिए प्रवेश दिया, उन्हें 4 महीने बाद अब स्कूल से निकालने की धमकी दी जा रहा है। इन निजी स्कूलों ने कार्रवाई के डर से अप्रेल में गरीब बच्चों को नि:शुल्क सीटों पर प्रवेश तो दे दिए, लेकिन अब अभिभावकों पर ट्यूशन फीस भरने, किताब-कॉपी और यूनिफॉर्म लेने का दवाब बना रहे हैं। जो परिजन नहीं मान रहे, उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश से ही रोका जा रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रत्येक निजी स्कूल में शुरुआती कक्षा की 25 फीसदी सीटों पर गरीब व अभावग्रस्त समूह के बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क प्रवेश देय है। प्रति बालक के लिए तय राशि के हिसाब से राज्य सरकार इसका पुर्नभरण करती है। इस राशि में पाठ्यपुस्तकों का खर्च भी शामिल है। यानी स्कूलों में बच्चों से पाठ्यपुस्तकों के नाम पर भी राशि नहीं वसूली जा सकती। उन्हें किताबें नि:शुल्क उपलब्ध करानी होती हैं।
स्कूल में प्रवेश से रोका
केस-01 : जगतपुरा निवासी कमलेश कुमार वर्मा ने अपनी बेटी लिपि को आरटीई के तहत अप्रेल में विवेक विहार के एक निजी स्कूल में प्रवेश दिलाया। स्कूल ने फीस भरने का दवाब बनाया तो फीस व किताबों के 21 हजार रुपए जमा कराने पड़े। अब 6 माह की फीस और जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। 3 सितम्बर के बाद बच्ची को प्रवेश भी नहीं करने दिया जा रहा है।
केस-02 : गुर्जर की थड़ी निवासी सुरेंद्र कुमार ने 4 साल पहले बेटी का एडमिशन गुर्जर की थड़ी स्थित एक निजी स्कूल में कराया। सुरेंद्र ने बताया, स्कूल हर साल किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाता है। इस साल बेटी पहली कक्षा में है और किताबों के लिए वापस दबाव बनाया जा रहा है। प्रिंसीपल से मिलने कई बार स्कूल गया मगर मिलने ही नहीं दिया जाता।
Published on:
17 Sept 2018 10:40 am
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