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बड़ी घोषणा से सरकार का यूटर्न, शुदृध हवा—पानी, पोषण, प्रदूषण की बात नहीं चाहती सरकार

स्वास्थ्य के अधिकार को बदलकर स्वास्थ्य की देखभाल कानून दिया नाम

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जयपुर

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Vikas Jain

Apr 10, 2022

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विकास जैन

जयपुर. राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के अधिकार कानून की मूल भावना को ही बदल दिया है। चिकित्सा विभाग की ओर से जारी इसके मसौदे में कानून का नाम ही बदलकर स्वास्थ्य की देखभाल कानून—2022 कर दिया गया है। मसौदे में बेहतर स्वास्थ्य ढांचें पर तो जोर दिया गया है, लेकिन आमजन के स्वस्थ जीवन जीने के अधिकारों के प्रावधान शामिल ही नहीं है। जिनमें शुदृध जल, शुदृध् हवा, बीमारी रहित वातावरण के प्रयास, डेंगू, मलेरिया, महामारी, औद्योगिक व वाहन प्रदूषण से होने वाली बीमारियों सहित पोषण और खाद्य सुरक्षा सहित अन्य विषय शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सरकार बनते ही इस मसौदे पर काम शुरू हुआ। उस समय विभिन्न संगठनों के साथ बैठक में स्वस्थ जीवन जीने के अधिकारों पर भी चर्चा की गई थी। लेकिन अब सामने आए मसौदे में इसे हटा दिया गया है।

स्वास्थ्य के अधिकार की परिभाषाएं..मसौदा बनाने वाले अधिकारी जरूर पढ़े

. एक कल्याणकारी राज्य में यह सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व होता है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए परिस्थितियों का निर्माण और उनकी निरंतरता सुनिश्चित करे

. अच्छा स्वास्थ्य लोगों को तभी मिल सकता है, जब स्वस्थ जीवन जीने जैसी परिस्थितियां हो, इसमें पर्यावरण, पोषण, बीमारियों से बचाव सब कुछ शामिल होने चाहिए

सेहत से जुड़े ऐसे प्रावधानों को किया दरकिनार

. ऐसा गवर्नेस सिस्टम बनाना होगा, जो आमजन की स्वस्थ जीवन शैली में बाधा बनने वालों की पहचान कर उन पर कार्यवाही सुनिश्चित कर सके, इसे कानून के दायरे में लाना होगा
. दूषित जल की आपूर्ति को रोकना होगा, ऐसे इलाके चिन्हित करने होंगे, जहां सीवरेज व पेयजल लाइने जजर्र है, दोनों का पानी मिक्स होकर घरों तक पहुंच रहा है, ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित हो
. सेहत का अधिकार सिर्फ स्वास्थ्य विभाग का काम नहीं हो, इसमें जलदाय, जल संसाधन, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज सहित अन्य विभागों को भी शामिल कर साझा रणनीति बनाई जाए
. पर्यावरण प्रदूषण संबंधी समस्याओं वाले इलाकों का नक्शा बनाकर वहां इसकी रोकथाम के लिए विशेष योजना बनाए
. मच्छर जनित बीमारियों किसकी लापरवा ही से पनप रही है, इसके जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों सहित आमजन को भी कानून के दायरे में लाया जाए
. सरकार यूनिवर्सल हेल्थ केयर की बात करे, मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण के लिए विशेष प्लान जारी करे
. हर व्यक्ति को खाद्य सुरक्षा की गारंटी दे, पोषण का दर्जा उच्चतम स्तर तक ले जाने पर काम हो
. श्ववांस, फेफड़े, सीओपीडी, टीबी और सिलिकोसिस सहित कई बीमारियां है, जो स्वस्थ वातावरण नहीं मिलने के कारण पनपती है
. संपूर्ण जनस्वास्थ्य प्रणाली पुर्नगठित हो, जिसमें जनभागीदारी तय हो
. अस्पतालों में मापदंड़ों के अनुरूप मेन पॉवर, डॉक्टर, नर्सेज, पैरामेडिकल व अन्य सुविधाओं की बात करनी होगी, दवा, टीके व अन्य के आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाना होगा
. नकली व अमानक दवा, गलत इलाज, मिलावट पर रोकथाम की बात करनी होगी
. फर्जी डिग्रीधारी स्वास्थ्य पेशेवरों को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा करनी होगी
. बेवजह अधिक दवा, जांच, ब्रांडेड या महंगी दवा लिखने वालों को भी जांच के दायरे में लाना होगा

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स्वास्थ्य की परिभाषा व्यापक है। स्वास्थ्य देखभाल तो सबसे जरूरी है ही। अभी यह कच्चा मसौदा है। सभी स्टेक होल्डर्स को शामिल कर यह बिल तैयार होगा तो अच्छा रहेगा। शुदृध हवा, पानी, पर्यावरण तो बड़े सेहत के विषय है हीं।
डॉ.वीरेन्द्र सिंह, पूर्व अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल

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पूरे मसौदे में स्वस्थ जीवन जीने के अधिकारों का जिक्र ही नहीं है। इसका नाम ही बदलकर स्वास्थ्य की देखभाल कर दिया गया है तो संबंधित अधिकारियों की मंशा को समझा जा सकता है। कानून को मूर्त रूप में लाने से पहले चिकित्सा विभाग को स्वास्थ्य के अधिकार की परिभाषाओं को अच्छी तरह पढ़ना चाहिए।
अमूल्य निधि, संयोजक, स्वास्थ्य अधिकार मंच


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