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सरकार ने छीना गरीब जनता का स्वास्थ्य अधिकार, 500 करोड़ के ये दो अस्पताल निजी से वापस ले सरकार

महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के विशेष प्रावधान नहीं

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जयपुर

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Vikas Jain

Jul 14, 2022

Rajasthan Right to Health Bill will be implemented

Rajasthan Right to Health Bill will be implemented

विकास जैन

जयपुर. राज्य में राइट टू हेल्थ बिल को मूर्त रूप दिए जाने से पहले विभिन्न संगठनों और आमजन ने राज्य सरकार की निजीकरण नीतियों पर जमकर आपत्तियां जताई है। राजधानी के मानसरोवर और सीकर रोड स्थित दो सरकारी अस्पताल भवनों को निजी समूहों से वापस लेकर स्वयं संचालित करने और यहां गरीब जनता को उनका स्वास्थ्य अधिकार दिलाने की सलाह सरकार को दी गई है।

इन दोनों अस्पताल भवनों की कुल लागत करीब 500 करोड़ रुपए है। मानसरोवर पर शिप्रा पथ स्थित मानस आरोग्य सदन को 15 वर्ष पहले सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज की शाखा के तौर पर संचालित करने के लिए बनाया गया था। वहीं, 20 वर्ष पहले सीकर रोड पर ट्रॉमा भवन तैयार किया गया था। जिसे सरकार ने पहले एक निजी अस्पताल को दिया, बाद में उस निजी अस्पताल ने दूसरे को बेच दिया। अब यह पूरी तरह निजी समूह के पास है और मानस आरोग्य सदन निजी सहभागिता से संचालित है। सरकार के बीमा मॉडल को भी नकारते हुए कहा गया है कि इसके बजाय सरकारी अस्पतालों का ढांचा ही मजबूत हो।

महिला—किशोरी स्वास्थ्य के लिए कुछ नहीं सोचा

बिल के मसौदे में महिलाओं, लड़कियों व ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष प्रावधान नहीं किए जाने को भी गलत बताया गया है। गौरतलब है कि इस बिल को राइट टू हेल्थ के बजाय राइट टू हेल्थ केयर नाम दिए जाने का खुलासा भी राजस्थान पत्रिका पूर्व में कर चुका है। इससे आमजन को स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ हवा जैसी स्वास्थ्य से संबंधित मूलभूत सुविधाएं देने से सरकार पीछे हटती नजर आ रही है।

सरकार को यह मिले सुझाव

— ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सरकारी डॉक्टरों को आवास, उनके बच्चों की शिक्षा के लिए वहां केन्द्रीय विद्यालय के बराबर स्तर के मॉडल स्कूल की सुविधा सहित डाक्टरों का ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के जरिये ठहराव हो
— मसौदे में कहा गया है कि जब नियम बनेंगें तो उसमें विस्तृत विवरण होगा, लेकिन नियम बनाने के लिए प्रस्तावित समय सीमा 6 माह रखी गई है, इसे एक माह किया जाना चाहिए
— दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और दवा प्रतिरोधक के प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी नहीं की गई है
— बीमा आधारित योजनाओं को सरकार वित्तपोषित नहीं करे। निजी अस्पतालों में वसूली रोकें
— दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए गाय—भैंस को दिए जाने वाले और फल
सब्जियों को जल्द पकाने के लिए काम में लिए जाने वाले इंजेक्शन प्रतिबंधित हो
— लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, डॉक्टर और नर्सेज सहित सभी चिकित्सा संवर्गों की पर्याप्त भर्तियां हो

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बिल का मसौदा अब काफी परिपक्व स्थिति में आ गया है। उच्च स्तर से भी इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। हमारा प्रयास तो यही है कि आगामी विधानसभा सत्र में यह पेश कर दिया जाए।
सुशील परमार, नोडल अधिकारी, राइट टू हेल्थ बिल