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Rajasthan’s Right to Health Bill : 10 मार्च तक इंतजार, उसके बाद निजी अस्पताल उठाएंगे ये बड़ा कदम

स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने देर रात किए अधिकारिक आदेश जारी, निजी अस्पतालों में फिर शुरू हुई सरकारी योजनाएं

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Rajasthan's Right to Health Bill : 10 मार्च तक इंतजार, उसके बाद निजी अस्पताल उठाएंगे ये बड़ा कदम

Rajasthan's Right to Health Bill : 10 मार्च तक इंतजार, उसके बाद निजी अस्पताल उठाएंगे ये बड़ा कदम

जयपुर। प्रदेश में सभी निजी अस्पतालों में बंद सरकारी योजनाओं को वापस शुरू कर दिया गया है। हालांकि इसका फैसला शुक्रवार को स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक में दिन में हो गया था। लेकिन कमेटी की ओर से देर रात इसके लिए आदेश जारी किए गए। जिसके बाद मरीजों को इस आदेश से बड़ी राहत मिलेगी। स्टेट ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन डॉ सुनील चुघ ने कहा कि हमारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से वार्ता हुई है। जिसके बाद हमने बिल को लेकर बैठक की। बैठक में कमेटी के सभी सदस्यों ने सरकारी योजनाओं को वापस शुरू करने को लेकर सहमति जाहिर की। ऐसे में अब निजी अस्पतालों में 10 मार्च तक सरकारी योजनाओं के बॉयकॉट को स्थगित किया जाता है। अब 10 मार्च तक सरकार के रूख का इंतजार करेंगे। उसके बाद आगामी निर्णय लिया जाएगा। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो फिर निजी अस्पतालों की ओर से आंदोलन किया जाएगा।



डॉ चुघ ने कहा कि निजी अस्पतालों में सरकारी योजनाओं के बॉयकॉट करने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हम नहीं चाहते की हमारी वजह से मरीज परेशान हो। लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। ऐसे में हमने मरीजों की परेशानी को देखते हुए सरकारी योजनाओं को वापस अस्पतालों में शुरू करने का निर्णय लिया है। लेकिन राइट टू हेल्थ बिल का विरोध अब भी जारी रहेगा। अभी इस मामले में कमेटी सीएस उषा शर्मा व वित्त सचिव अखिल अरोड़ा से मिलेगी। जिनसे बिल को लेकर वार्ता होगी।



11 फरवरी को किया था बॉयकॉट..

निजी अस्पतालों की ओर से 11 फरवरी को सरकारी योजनाओं का बॉयकाट किया गया था। 14 दिन तक अस्पतालों में सरकारी योजनाएं बंद रही। जिसके चलते मरीजों को केस देकर इलाज कराना पड़ा। या फिर मेडिक्लेम पॉलिसी के आधार पर अस्पतालों में इलाज हुआ। मुख्यमंत्री चिरंजीवी बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने से निजी अस्पतालों में मरीजों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं इस दौरान सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई थी।