Right To health Bill : साब, दूर से आए हैं। रातभर से परेशान है। डॉक्टर साब कब आएंगेे। नंबर कब आएगा। बहुत दिक्कत हो रही है। कतार में खड़े रहना मुश्किल है। मरीजों की यह पीड़ा राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital), कावंटिया अस्पताल (Kawantia Hospital), जयपुरिया अस्पताल (Jaipuriya Hospital) समेत अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में सुनाई दी। कारण कि दो घंटे कार्य बहिष्कार के बाद कई चिकित्सक वापस ओपीडी में आए ही नहीं। जिससे मरीजों की लंबी कतारे लगी रही। कई मरीज बिना इलाज के लौट गए तोए कई गंभीर मरीजों को दूसरे चिकित्सकों से परामर्श के लिए डेढ़ से दो घंटे कतारों में गुजारने पड़े। उन्हें काफी परेशानी हुई।
सबसे ज्यादा परेशानी एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital Jaipur) के धनवंतरि ब्लॉक में देखी गई। यहां मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी समेत अन्य विभागों की ओपीडी में भीड़ रही। 40 फीसदी चिकित्सक दोपहर 12 बाद भी गायब ही मिले। सबसे ज्यादा परेशानी मेडिसिन ओपीडी में दिखी। महज दो ही डॉक्टर बैठे नजर आए। अन्य चैंबर खाली थे। भीड़ में विवाद की स्थिति भी देखी गई। इससे अस्पताल प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। साथ ही चिकित्सा व्यवस्थाएं भी अब वेंटिलेटर पर पहुंच गई है।
हाथ जोड़े फिर भी मदद नहीं
एसएमएस अस्पताल के धनवंतरि ओपीडी में नीमकाथाना (Neem Ka Thana) से आए मरीज प्रभु ने बताया कि शरीर में कमजोरी के कारण उसे चलने फिरने में दिक्कत होती है। एक घंटे से कतार में लगा हंू। अब खड़ा रहने की हिम्मत नहीं। गार्डों के भी हाथ जोड़ चुका। कोई सुनने को तैयार नहीं।
सर्जरी के मरीज को डेढ़ घंटे बाद देखा
टोंक से आए बुजुर्ग रामस्वरुप वर्मा ने बताया कि दस दिन पहले उनकी सर्जरी हुई थी। वॉल्व डाले गए थे। डेढ़ घंटे तक लाइन में लगे फिर डॉक्टर को दिखा पाए। कतारों में काफी दिक्कत हुई।
चार घंटे से परेशान, कहां जाए
उत्तरप्रदेश के फैजाबाद से आए शोभरन सिंह ने बताया कि बेटे के चेस्ट में दर्द हो रहा है। रातभर सफर करके यहां पहुंचे। चार घंटे हो गए। अभी तक डॉक्टर ने नहीं देखा। अब यहां से कहां जाएं।
दूसरे अस्पतालों के मरीजों को परेशानी
सवाई मानसिंह अस्पताल (Sawai Man Singh Hospital) में जनाना, महिला अस्पताल, जेके लोन (JK Lone) समेत अन्य अस्पतालों से 2डी इको, सीटी स्कैन, एमआरआइ समेत अन्य जांचे कराने वाले मरीजों को भी परेशानी हुई। 2 डी इको की जांच एसएमएस के इमरजेंसी मरीजों के अलावा अन्य मरीजों की नहीं हुई। जिससे मरीजों को बिना जांच वापस लौटना पड़ा।