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गलत रोड कट, गलत डिवाइडर जैसी रोड इंजीनियरिंग की खामी भी हादसों की बड़ी वजह

- राजधानी में कई सड़कों पर रोड लाइट नहीं, कई जगह ट्रैफिक सिग्नल दिखते ही नहीं

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जयपुर

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Jaya Gupta

Feb 17, 2023

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जयपुर. वाहनों की तेज गति के साथ-साथ सड़कों की खामी के कारण भी हादसे बढ़ रहे हैं। शहर-जिले की सड़कों के साथ-साथ राज्य व नेशनल हाईवे पर भी रोड इंजीनियरिंग की खामी देखने को मिल रही है। गलत जगह पर रोड कट, रास्ते के बीच में डिवाइडर बनाने, सड़क पर गड्ढे, रोड लाइट नहीं होने के साथ ही ट्रैफिक सिग्नल दिखाई नहीं देने सहित कई कारणों से चौराहों और प्रमुख मार्गों पर हादसे हो रहे हैं। इसके बावजूद जेडीए, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई सहित अन्य सड़क एजेंसियां उन्हें समय पर दुरुस्त नहीं कर रही हैं।

रोड इंजीनियरिंग की ये खामियां :

- गलत रोड कट : रोड कट रास्ते की जरूरत के हिसाब से नहीं बल्कि प्रभुत्व के हिसाब से बनाए जा रहे हैं। कई तिराहों पर रोड कट की आवश्यकता है मगर वहां कट नहीं है। कई अस्पतालों, स्कूलों के बाहर रोड कट नहीं है। वहीं कई पेट्रोल पम्प, होटल आदि के बाहर रोड कट बना दिए गए हैं। हाईवे पर भी कई चहेतों के पेट्रोल पम्प के बाहर कट बनाए गए हैं। ये हादसों को सीधा निमंत्रण है।
- रास्ते के बीच में डिवाइडर : मानसरोवर से रीको एरिया के तरफ जाते हुए, स्टेच्यू सर्कल के पास रास्ते के बीचों-बीच डिवाइडर बना दिए गए हैं। इन पर न तो रेडियम लगा हुआ है और न ही रोड लाइट है। ऐसे में रात के समय ये दिखाई नहीं देते हैं। कई बार वाहन टकरा जाते हैं।
- सड़क पर गड्ढे : गड्ढे बड़ी समस्याओं में से एक हैं। शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश की शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जिस पर गड्ढे न हो। कई गड्ढे तो इतने गहरे होते हैं कि दुपहिया वाहन चालक उनमें गिर जाते हैं।
- ट्रैफिक सिग्नल नहीं : शहर के कई प्रमुख चौराहों, तिराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं हैं। ऐसे में लोग मनमर्जी से वाहन चलाते हैं। तेज स्पीड में चौराहे, तिराहे पार करने पर भी हादसे का खतरा बना रहता है।
- सड़क पर अधिक ऊंचाई वाले सीवर चैम्बर : गड्ढे से अधिक बड़ी समस्या सड़क पर अधिक ऊंचाई वाले सीवर चैम्बर से होती है। अचानक ऊंचाई वाला चैम्बर आने पर वाहन चालक बैलेंस नहीं बना पाते हैं।
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पत्रिका को लोगों ने वाट्सऐप के माध्यम से बताई समस्याएं
न स्पीड ब्रेकर और न ही साइन बोर्ड

- महारानी फार्म पर द्रव्यवती नदी के पास न तो स्पीड ब्रेकर है और न ही साइन बोर्ड। सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर है। जिसके कारण रात के समय वाहन टकराने का खतरा रहता है। यहां स्पीड ब्रेकर बनाए जाने चाहिए।
- व्यास माही

ट्रैफिक सिग्नल पर लगाए जाएं डिस्प्ले बोर्ड

- यलो लाइट होती है, लोग सोचते हैं कि वे चौराहा तुरंत पार कर जाएंगे। यह देखकर वाहन की गति बढ़ा लेते हैं। ऐसे में वहां एक डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए, जिस पर नंबर दिखाई दे। वाहन नंबर देखकर लोग उसे पार करने से बचेंगे।
- एम के जैन

ट्रैफिक सिग्नल के साथ लगाए जाए पुलिसकर्मी भी

- भृगु पथ-न्यू सांगानेर रोड चौराहे पर दोनों ओर एक-एक पुलिस कर्मी होने चाहिए। वहां पुलिसकर्मी नहीं होने से लोग ट्रैफिक सिग्नल की पालना ही नहीं करते हैं। इसी कारण 2 फरवरी को वहां एक हादसा हुआ था।
- जय सिंह, सचिव, एसबीबीजे ऑफिसर्स कालोनी विकास समिति

- कई चौराहों पर नहीं दिखती ट्रैफिक लाइट

- ओटीएस, बजाज नगर तिराहा पर लोगों को ट्रैफिक लाइट नजर ही नहीं आती है। कई जगह बीच में ट्रैफिक कैनोपी लगी होती है तो कहीं ट्रैफिक लाइट के आगे विज्ञापन बोर्ड का दूसरा खंभा लगा होने के कारण दिखाई नहीं देती है।
- अरुण कुमार