
हड़ताल से पहले रोडवेजकर्मियों की 'कदमताल', रैली निकाल दिखाया दम
जयपुर। राजस्थान रोडवेज के सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आज जयपुर में प्रदेशस्तरीय रैली निकाली। इस रैली में शामिल होने के लिए अलग-अलग जिलों से कर्मचारी एवं संगठनों से जुड़े नेता जयपुर पहुंचें। दोपहर करीब 12 बजे यह रैली सिंधीकैंप बस स्टैंड से रवाना हुई। जो परिवहन मार्ग पर जाकर सभा में तब्दील हो गई। इस दौरान कर्मचारियों ने रोडवेज प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था कि वे बीते करीब दो माह से अपनी मांगों के लिए अलग-अलग चरणों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इस रैली में 24 नवंबर को होने वाली रोडवेज की हड़ताल के बारे में भी रणनीति भी बनाई गई है।
प्रदेश संयोजक एमएल यादव ने बताया कि रैली सिंधीकैंप बस स्टैंड से रवाना होकर वनस्थली मार्ग, शहीद स्मारक, गर्वनमेंट प्रेस, चौमूं हाउस सर्किल से परिवहन मार्ग पहुंचीं। जहां रोडवेज मुख्यालय के जयपुर डिपो पर विशाल पांडाल बनाया गया था, जहां पर सभा आयोजित की गई। संयुक्त मोर्चा की ओर से आयोजित की गई इस रैली में आयोजकों ने दो हजार लोगों के होने का दावा किया। जबकि पुलिस के मुताबिक करीब डेढ़ हजार कर्मचारी एवं पूर्व कर्मचारी रैली में पहुंचें।
हड़ताल हुई तो लाखों लोग होंगे परेशान
बता दें कि आंदोलन का आखिरी और नवां चरण हड़ताल का होगा। इस संबंध में कर्मचारियों ने रोडवेज प्रशासन को 14 दिन पूर्व का नोटिस भी दे दिया है। ऐसे में यदि हड़ताल होती है तो प्रदेश के लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं, रोडवेज प्रशासन से अब तक संयुक्त मोर्चा की विशेष बातचीत भी नहीं हुई है। हालांकि रोडवेज ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें कहा है कि यदि रोडवेजकर्मी हड़ताल पर जाते हैं तो उन्हें उस दिन का वेतन नहीं दिया जाएगा।
कर्मचारी हैं प्रशासन से नाखुश
संयुक्त मोर्चे की ओर से 21 सूत्रीय मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। इसमें रोडवेज प्रबंधन की ओर से श्रम कानूनों के निरन्तर उलंघन और बदले की भावना से यूनियन के पदाधिकारियों को प्रताड़ित करने का भी आरोप लगा गया। सभा में रोडवेज प्रशासन पर ड्राइवर, कंडक्टर और मैकेनिक संवर्ग के कर्मचारियों के साथ लगातार भेदभाव का आरोप लगाया गया। साथ ही कहा गया कि कर्मचारी मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जा रहे हैं। इसलिए रोडवेज की अनुचित नीतियों के खिलाफ मजबूरन विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कर्मचारियों से प्रशासन श्रम कानूनों के तहत निर्धारित समय से ज्यादा काम करवा रहा है। लेकिन, उन्हें ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
Published on:
17 Nov 2022 01:32 pm
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