शहरी रोजगार गारंटी योजना क्यों है जरूरी?
जयपुर। आर्थिक तौर कोरोना महामारी का असर देश के हर वर्ग पर पड़ा है। मजदूर वर्ग राज्यों में मनरेगा के तहत और काम मांग रहे हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों के मजदूरों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। शहरों में भी इस समय काम ना मिलने से मजदूर परेशान हैं। दिहाड़ी पर घर चलाने वालों के लिए संकट बड़ा होता जा रहा है। ऐसे में शहरी रोजगार गारंटी योजना की मांग उठ रही है। केंद्र सरकार से जहां मनरेगा में काम के दिनों और मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही है, वहीं शहरी क्षेत्रों के मजदूरों का रोजगार सुनिश्चित करने के लिए इस कानून की मांग मजदूर संगठन कर रहे हैं।
क्यों जरूरत कानून की
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 के तहत मनरेगा में 100 दिनों का काम ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को दिया जाता है। वहीं शहरी मजदूरों के लिए शहरी क्षेत्र में ऐसा कोई कानून नहीं बना है। अभी शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है। मजदूर संगठनों का कहना है कि शहरी रोजगार गारंटी कार्यक्रम न केवल श्रमिकों की आय का साधन बनेगा बल्कि अर्थव्यवस्था पर को भी पटरी पर लाया जा सकता है। यह
छोटे शहरों में स्थानीय मांग को बढ़ावा देगा, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सेवाओं में सुधार करेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा।
यह कहना है शहरी मजदूरों का
उदयपुर शहर के रहने वाले जावेद खान और मांगीलाल सालवी ने कहा कि शहर में पहले निर्माण या अन्य किसी भी प्रकार का काम मिल जाता था, लेकिन अभी सभी गतिविधियां ठप्प पड़ी हैं, अब हमें रोजगार नहीं मिलेगा तो भूखे मरेंगे, सरकार को शहरी क्षेत्र के लिए शहरी रोजगार गारंटी कानून लाना चाहिए। मनरेगा के तहत सड़कों या अन्य सरकारी भवनों का निर्माण भी शहरी क्षेत्रों में नहीं हो रहा। इसीलिए मनरेगा भी शहरी मजदूरों को काम नहीं दे पा रहा।
Published on:
30 Jun 2020 07:09 pm
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