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आरएसएस की व्यावसायिक शाखा करेगी सामाजिक सर्वेक्षण, फिर होगा यह काम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यावसायिक शाखाओं के द्वारा शाखा क्षेत्र का सामाजिक सर्वेक्षण कराएगी। इस सर्वेक्षण के माध्यम से पता लगाया जाएगा कि कितने लोग कौनसी जाति—बिरादरी के हैं। उनकी क्या समस्याएं हैं, किस प्रकार का शैक्षणिक स्तर हैं, कितने सरकारी प्रावइेट नौकरी में है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Mar 15, 2023

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यावसायिक शाखाओं के द्वारा शाखा क्षेत्र का सामाजिक सर्वेक्षण कराएगी। इस सर्वेक्षण के माध्यम से पता लगाया जाएगा कि कितने लोग कौनसी जाति—बिरादरी के हैं। उनकी क्या समस्याएं हैं, किस प्रकार का शैक्षणिक स्तर हैं, कितने सरकारी प्रावइेट नौकरी में है। इस सूची के आधार पर क्षेत्र की समस्या को कैसे दूर कर सकते हैं, इस बारे में विचार किया जाएगा। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 12, 13 व 14 मार्च को हरियाणा के पानीपत जिले हुई बैठक में यह निर्णय किया गया।

राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक रमेश अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष राजस्थान में 11 संघ शिक्षा वर्ग लगेंगे, इनमें विभिन्न आयु वर्ग के करीब तीन हजार स्वयंसेवक प्रशिक्षण लेंगे। वहीं देशभर में संघ शिक्षण के 109 शिक्षण वर्ग लगेंगे, जिसमें लगभग 26 हजार स्वयंसेवकों के शिक्षण प्राप्त करने का अनुमान है। संघ का काम वर्तमान में 80 हजार स्थानों पर चल रहा है। आने वाले शताब्दी वर्ष में एक लाख से ज्यादा स्थानों पर संघ का सीधा काम संघ की शाखा या संघ का मिलन हो। इसे ध्यान में रखते हुए देश में 2 वर्ष के लिए पूरा समय देने वाले 2500 से ज्यादा शताब्दी विस्तारक काम करेंगे। उन्होंने बताया कि इस प्रतिनिधि सभा में स्व आधारित राष्ट्र के नवोत्थान का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें स्वयंसेवक को विशेष रूप से और संपूर्ण समाज को संघ की ओर से आह्वान किया गया। जिसके तहत स्वदेशी, स्वधर्म, स्वराज और स्व के प्रति अभिमान का भाव जागृत करने का संकल्प लिया जाना है।

तीन वक्तव्य किए प्रसारित

उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह की ओर से तीन वक्तव्य प्रसारित किए गए। इसमें पहला वक्तव्य भगवान महावीर के निर्वाण के 2550वें वर्ष के संपन्न होने पर रहा। इसके अलावा आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती का ये 200वां जन्म जयंती वर्ष है, उस पर दूसरा वक्तव्य प्रसारित किया गया। जबकि तीसरा वक्तव्य छत्रपति शिवाजी के राज्यारोहण कार्य 450 वां वर्ष को लेकर हुआ।