जयपुर. राजस्थान पर्यटन निगम की होटल किस तरह से निगम अफसरों के कुप्रबंधन का शिकार हैं इसकी बानगी जयपुर शहर में ही देखने को मिल रही है। हाल यह है कि निगम की गणगौर होटल जहां हर महीने करोडों कमा रही है, वहीं 500 मीटर दूर होटल तीज के कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्चे निकालने के लिए होटल की दूसरी मंजिल को किराए पर देने तक की नौबत आ गई है। अन्य जिलों में संचालित निगम के दूसरे होटलों का भी ऐसा ही हाल है।
होटल तीज शहर में प्राइम लोकेशन पर है। यहां कमरों की संख्या भी गणगौर के मुकाबले ज्यादा है और इसका परिसर भी बड़ा है। लेकिन होटल की आय कैसे बढे इसे लेकर होटल प्रबंधन कभी गंभीर नहीं रहा। होटल की मेहमाननवाजी सुधारने,कमरों का इंटीरियर सुधारने की कोई कवायद नहीं हुई। यही वजह रही कि होटल लगातार घाटे में चलती रही।
गणगौर कमाए छह करोड़
बीते तीन माह में होटल गणगौर की छह करोड़ की आय हुई है। इसमें डेढ करोड़ मुनाफा भी शामिल है। इस मुनाफे की रकम से होटल में अत्याधुनिक लिफ्ट लगाने और एक मीटिंग हॉल बनाने की तैयारी है। होटल प्रबंधन आय बढाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सरकारी आयोजनों में खान-पान के ऑर्डर ले रहा है।
बहरोड़ मिडवे आज बदहाल
जयपुर-दिल्ली हाईवे पर बहरोड़ मिडवे कभी करोड़ों रुपए कमा कर देने वाली यूनिट थी। लेकिन शीर्ष अफसरों के कुप्रबंधन से आज मिडवे बदहाल है और बंद होने के कगार पर है। ऐसा ही हाल अलवर के सिलीसेढ़ व पुष्कर में होटल पुष्कर सरोवर का है।
जीएम चाहे तो बदल सकती सूरत
तीन और पांच सितारा निजी होटलों में आय का पूरा जिम्मा जनरल मैनेजर (जीएम) के ऊपर होता है। जीएम मेहमानों की छोटी से छोटी परेशानी खुद देखता है। लेकिन निगम होटलों के जीएम छह बजे बाद होटल में मौजूद नहीं रहते हैं।